'शहीद-ए-आजम' भगत सिंह की जयंती, देश दे रहा है श्रंद्धाजलि

नई दिल्ली (27 सितंबर): 'शहीद-ए-आजम' भगत सिंह की आज 110वीं जयंती है। इस मौके पर देश उन्हें श्रद्धांजलि दे रहा है और नमन कर रहा है। भगत सिंह का जन्म 27 सितम्बर 1907 को एक जाट सिक्ख परिवार में पंजाब प्रांत के लायलपुर जिले में बंगा गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम किशन सिंह और माता का नाम विद्यावती था।

अमृतसर में 13 अप्रैल 1919 को हुए जलियांवाला बाग हत्याकाण्ड ने भगत सिंह की सोच पर गहरा प्रभाव डाला था। हालांकि इस समय भगत सिंह की उम्र केवल 12 साल थी।  इस हत्याकांड की खबर मिलते हीं वे अपने स्कूल से 12 मील पैदल चलकर जलियांवाला बाग पहुंच गए थे, वे 14 वर्ष की आयु से ही क्रान्तिकारी समूहों से जुड़ गए थे। लाहौर के नेशनल कॉलेज़ की पढ़ाई छोड़कर भगत सिंह ने भारत की आज़ादी के लिये नौजवान भारत सभा की स्थापना की।    काकोरी काण्ड में राम प्रसाद 'बिस्मिल' सहित 4 क्रान्तिकारियों को फांसी व 16 को कारावास की सजाओं से भगत सिंह इतने अधिक आक्रोशित हो गए कि वो चन्द्रशेखर आजाद के साथ उनकी पार्टी हिन्दुस्तान रिपब्लिकन ऐसोसिएशन से जुड गये और उसे एक नया नाम हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन दिया।   भगत सिंह ने राजगुरु के साथ मिलकर 17 दिसम्बर 1928 को लाहौर में सहायक पुलिस अधीक्षक रहे अंग्रेज़ अधिकारी जेपी सांडर्स को मारा था. इस कार्रवाई में क्रान्तिकारी चन्द्रशेखर आज़ाद ने उनकी पूरी सहायता की थी। क्रान्तिकारी साथी बटुकेश्वर दत्त के साथ मिलकर भगत सिंह ने वर्तमान नई दिल्ली स्थित ब्रिटिश भारत की तत्कालीन सेण्ट्रल एसेम्बली के सभागार संसद भवन में 8 अप्रैल 1929 को अंग्रेज़ सरकार को जगाने के लिये बम और पर्चे फेंके थे। बम फेंकने के बाद वहीं पर दोनों ने अपनी गिरफ्तारी भी दी थी।

भगत सिंह ने केन्द्रीय संसद (सेण्ट्रल असेम्बली) में बम फेंककर भी भागने से मना कर दिया। जिसके फलस्वरूप इन्हें 23 मार्च 1931 को इनके दो अन्य साथियों, राजगुरु तथा सुखदेव के साथ फांसी पर लटका दिया गया।