सावधान: केवल 'फोन नंबर' से हैक हो सकता है आपका फोन, सुनी जा सकती हैं कॉल्स

नई दिल्ली (19 अप्रैल): हैकर्स ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि कोई सिक्योरिटी के लिए कितना भी कदम क्यों ना उठा ले। लेकिन एक हैकर को लोकेशन और मोबाइल के फोन कॉल्स, मैसेजेस को ट्रैक करने के लिए केवल फोन नंबर ही काफी है।

'द गार्डियन' की रिपोर्ट के मुताबिक, अटैकर किसी व्यक्ति की लोकेशन को केवल उसके मोबाइल फोन के मास्ट ट्राइएंगुलेशन के जरिए पता लगा सकता है। इसके अलावा वह उसके भेजे और रिसीव किए गए टेक्स्ट मेसेजेस, लॉग्स को भी रिकॉर्ड करने के साथ फोन कॉल्स को सुन भी सकता है। इसके लिए आइडैंटिफायर के लिए केवल फोन नंबर ही जरूरी है।  

यहां कस्टमर्स के साथ समस्या है कि वे जासूसी के बचने के लिए कम ही कुछ कर सकते हैं। इनमें से है कि अगर नेटवर्क साइड पर अटैक होता है, तो भले ही कोई भी फोन का इस्तेमाल हो रहा हो उस मोबाइल फोन को टर्न ऑफ कर लेना। 

1975 में डेवलेप की गई प्रोटोकॉल, सिग्नलिंग सिस्टम नंबर 7 (SS7) हैकर्स के लिए यह सुलभ बनाती है, कि वह मैसेजेस, कॉल्स और लोकेशन को एक्सेस कर सकें। इन्हें हासिल करने के लिए सूचना के तौर पर केवल फोन नंबर ही काफी होता है।

हालांकि, यह पहली बार नहीं है कि इस पैमाने पर हैक होना सामने आया है। जिससे ब्रिटेन के यूजर्स बेचारा महसूस कर रहे है। इस तरीके को सबसे पहले सार्वजनिक 2015 में एक हैकर कॉन्फ्रेंस में किया गया था। 

हैकिंग से कैसे बचें

कॉल्स, टेक्स्ट्स को किसी मध्यस्थ को एक्सेस ना कर पाने से बचने के लिए एक आसान तरीका है कि आप अपने कम्यूनिकेशन्स को प्राइवेट रखें। इसके लिए आप इन्क्रिप्टेड मैसेजिंग और कॉलिंग एप्स जैसे टेलीग्राम, व्हाट्सएप, आईमैसेज और फेसटाइम का इस्तेमाल करें।

जबकि, नागरिकों की प्राइवेसी एपल, माइक्रोसॉफ्ट, गूगल और फेसबुक जैसी टेक कंपनियों के लिए काफी महत्वपूर्ण हैं। वे इसका समर्थऩ भी करते हैं। ये आतंकी संगठनों के कम्यूनिकेशन्स को भी अनमॉनिटर्ड रखता है। जिसकी वजह से जिनकी प्राइवेसी सुरक्षित रखी जा रही है, उनके लिए भी खतरा पैदा होता है।

टिम कुक ने स्पेशल स्प्रिंग इवेंट में आईफोन एसई की लॉन्चिंग के साथ यह सवाल उठाया कि सरकार को कितना डेटा एक्सेस करने दिया जाए। यह विषय पर और भी ज्यादा बातचीत की जरूरत है।