सावधान! 'Chinese' मिलावट ना बिगाड़ दे आपकी सेहत, नकली चावल के बाद अब प्लास्टिक के अंडे

नई दिल्ली (1 अप्रैल): 'नक्कालों से सावधान' ये जुमला आपने पढ़ा भी होगा और सुना भी, लेकिन चीन में बने कुछ सामानों को देखकर तो आप ये अंदाजा भी नहीं लगा पाएंगे कि ये नकली हैं। चीन दुनिया का वो देश है जो सबसे ज्यादा नकली वस्तुओं को बनाने में माहिर है। चीन से आए नकली इलेक्ट्रॉनिक्स सामान, मोबाइल और स्फॉटवेयर तो आपने खूब सुने होंगे लेकिन नकली अंडे, चावल, ब्रेड, बंदगोभी और तरबूज सुने हैं क्या? जी हां सही सुना नकली खाद्य पदार्थ जिसे देखकर कर हैरान हो जाएंगे आप। अब डराने वाली बात यह है कि ये जहर आपके घर तक पहुंच गया है। कोलकाता में एक ऐसा ही मामला सामने आया है।


क्या है पूरा मामला

कोलकाता की एक महिला अनीता कुमार ने आरोप लगाया है की जो अंडे उन्होंने खरीदे थे वे नकली निकले। इस मामले को लेकर अनीता कुमार ने कोलकाता के करीया पुलिस स्टेशन में गुरुवार शाम रिपोर्ट दर्ज कराई है। रिपोर्ट के मुताबिक अनीता अनीता कुमार ने अपनी शिकायत में कहा कि जब वह उन अंडों से ऑमलेट बनाने की कोशिश कर रही थीं तब उन्हें लगा कि वे आर्टिफिशल हैं। उन्होंने बताया डॉक्टर ने मेरे बेट को रोज एक अंडा खाने को कहा है। हम लोकल मार्केट से बहुत सारे अंडे एक साथ ले लेते हैं। मैंने नोटिस किया कि मेरा बेटा जब भी ये अंडे खाता, वह बीमार पड़ जाता। अनीता ने बताया, जब मैंने माचिस की तीली जलाई तो अंडे का बाहरी खोल प्लास्टिक की बदबू के साथ जलने लगा। इसके बाद मैंने तुरंत करीया पुलिस स्टेशन पर रिपोर्ट लिखाई।


दूकानदार का तर्क- रिपोर्ट के आधार पर शुक्रवार की सुबह कोलकाता पुलिस ने दुकानदार मोहम्मद शामिम अंसारी को गिरफ्तार कर लिया। हालांकि, अंसारी ने यह दावा किया कि मैं थोक विक्रेता से ही अंडे खरीदता हूं और ये फर्जी नहीं हो सकते। पुलिस के अनुसार अंसारी ने आंध्रप्रदेश के एक थोक व्यापारी से 1.15 लाख के अंडे खरीदे। आरोपी ने कहा कि अगर ऐसा है तो हो सकता है कि उस थोक विक्रेता ने चीन से ये अंडे खरीदे हों। मेयर अटिन घोष ने शुक्रवार को कई बाजारों में जाकर जांच शुरू की। दुकान से बरामद किए गए अंडे और अनीता के घर में रखे अंडों को टेस्ट के लिए लैब में भेजा गया है।


भारत के बाजार में चीन निर्यात कर रहा है प्लास्टिक के नकली अंडे

सावधान रहिए चीन हमारे खाने में जहर मिला रहा है। चीन में बन रहा है नकली खाने का सामान। पिछले साल केरल में चीन के चावल बेचे जाने की खबर थी। जांच करने पर पता चला कि प्लास्टिक से बना चावल भारी मात्रा में मार्केट में बेचा जा रहा था। सोशल मीडिया में ऐसे कई सामान बनाने के वीडियो शेयर किए जा रहे हैं। आप भी देखिए ये वीडियो रहिए सावधान-


नकली अंडे

अगर आप भी अंडा खाने के दीवाने हैं या फिर कभी कभार ही सही पर अंडे खाते हैं तो ये खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। क्योंकि कहीं ऐसा ना हो कि आप जो अंडे खा रहे हैं वो अंडे आपकी सेहत बिगाड़ दें। मुर्गी के अंडे भी कृत्रिमतौर पर बनाने के मामले में भी चीन काफी चर्चित रहा है। फर्जी अंडे का खोल कैल्सियम कार्बोनेट से तैयार किया जाता था। वहीं, अंडे का पीला व सफेद हिस्सा क्रमश: सोडियम एल्गीनेट, फिटकरी, जिलेटिन, खाने योग्‍य कैल्सियम क्लोराइड, पानी और खाने का रंग डालकर बनाया जाता था। सबसे पहले सोडियम एल्गीनेट और गरम पानी को मिलाकर नकली अंडे के खोल में डाला जाता था। इसके बाद उसमें जिलेटिन, बेनजॉइक एसिड, एलम समेत दूसरे केमिकल के जरिए अंडे का सफेद द्रव्य तैयार किया जाता था। अंडे का खोखा तैयार करने के लिए पैराफिन मोम, जिप्सम पाउडर, कैल्सियम पाउडर सहित अन्य चीजों का उपयोग किया जाता है।


कैसे होते है ये अंडे? नकली अंडे के बाहरी सफेद आवरण को तैलीय मोम, जिप्सम पाउडर और कैल्शियम कार्बोनेट, और दूसरे तत्वों को मिलाकर बनाया जाता है. इसमें सोडियम एल्गिनाइट, एल्यूम, जिलेटिन, खाने योग्य कैल्शियम भी होते हैं. इतना ही नहीं इसमें पानी और खाने के योग्य रंगों को मिलाकर उसे हूबहू असली अंडे की शक्ल दी जाती है.


अंदरूनी भाग- अंडे के अंदर का हिस्सा पीले रंग का होता है जिसे योक के नाम से जाना जाता है. इस हिस्से को बनाने के लिये जिलेटिन, सोडियम एल्गिनाइट, एल्यूम और कैल्सियम की जरूरत होती है. कैल्सियम की मात्रा उतनी ही होती है जितना एक मनुष्य खा सकता है.


रंगों का प्रयोग- खा सकने योग्य रंगों के प्रयोग से इसे ठीक वैसी ही शक्ल दी जाती है जैसी असली अंडों की होती है.


अंडे बनाने की प्रक्रिया- गुनगुने पानी में उचित मात्रा में सोडियम एल्गिनाइट मिलाया जाता है. उसके बाद जिलेटिन, बेंजोइक अम्ल, एल्यूम और कुछ दूसरे रसायनों के साथ मिलाकर अंडे का सफेद हिस्सा तैयार किया जाता है. अब तक तैयार किये गये मिश्रण में नींबू का रंग मिला दिया जाता है. उसके बाद इस मिश्रण में कैल्सियम क्लोराइड डाल कर उसे अंडों के आकार में ढ़ाल दिया जाता है.


ऐसे पहचानिए नकली अंडे- कृत्रिम अंडे का बाहरी छिल्का हल्के भूरे रंग का और खुरदुरा होता है, जबकि असली अंडा चिकना होता है उबालने के बाद कैल्शियम कार्बोनेट का आवरण तोड़ने पर कृत्रिम अंडे का भीतरी हिस्सा असली की तुलना में कड़ा होता है. पीला भाग गेंद की तरह हो जाता है और थोड़ी ऊंचाई से छोड़ने पर गेंद जैसा उछलती भी है।  कृत्रिम अंडे के भीतर से सामान्य अंडे जैसा ही पदार्थ निकलता है, इसे खुला छोड़ने पर कीड़े उसके पास नहीं आते.


प्लास्टिक के चावल

प्लास्टिक चावल : यह आलू, शकरकंद और सिंथेटिक रेसिन से बना चावल है। यह आसानी से नहीं पचता और कई गंभीर बीमारियों का कारण बनता है। इसी तरह, चीन में एक खास तरह का चावल पैदा होता है वुनचांग, जो खुशबू से पहचाना जाता है। इसकी पैदावार महज आठ लाख टन होती है, लेकिन दुनिया भर के बाजारों में एक करोड़ टन चावल हर साल बेचा जाता है। यानी 90 लाख से टन ज्यादा मिलावटी चावल लोग खाते हैं।


कैसे बनता है यह चावल... इसे बनाने के लिए पहले आलू को चावल के आकार में ढाल लिया जाता है। इसके बाद इसमें इंडस्ट्रियल सिंथेटिक रेजिन मिलाकर अंत में इन्‍हें तब तक अच्‍छी तरह मिलाया जाता है जब तक ये पूरी तरह चावल की तरह नजर नहीं आने लगते।


सामान्य चावल की तरह गल जाता है- यह यह चावल सफेद प्लास्टिक का बना होता है, जो उबलने के तुरंत बाद वैसे ही गल जाता है, जैसे सामान्य असली चावल। बस फर्क इतना है कि असली चावल पेट में जाने के बाद शरीर को पोषक तत्व प्रदान करते हैं, और ये प्लास्टिक! अगर आप बड़ा कटोरा भरकर यह चावल खाते हैं, तो इसका मतलब आपने एक बड़ा पॉलीथीन बैग खाया है।


गत्ते की ब्रेड

चीनी सड़क विक्रेता गत्‍ते से डबल रोटी तैयार करते थे। इसके लिए वे केमिकल में गत्‍ते को मिलाकर मुलायम करते फिर उसमें सुअर की चर्बी और फ्लेवर्ड पाउडर मिलाते थे। इसके बाद इसका स्टफ बनाकर भाप में पकाते थे। मजेदार बात यह है कि इस रिपोर्ट का खुलासा करने वाले सीटीवी के पत्रकार को हिरासत में लिया था।


नकली बंदगोभी

लगभग 40 सेकंड के वीडियो में देखें चीन में नकली बंदगोभी भी बनाई जा रही है, ये बंद गोभी बिलकुल असली बंदगोभी जैसी है। इसे केमिकल से बनाया जाता है।


नकली तरबूज

चीन में नकली तरबूज भी बनते हैं। बिलकुल असली से दिखने वाले ये तरबूज टुकड़ों में काटने पर पर अजीब से दिखते हैं।

चीन में बनती हैं दुनिया की 63% नकली चीजें

- दुनिया के बड़े ब्रांड्स की नकल सबसे ज्यादा चीन में बनती हैं।

- ओईसीडी की एक रिपोर्ट के मुताबिक 63.2% नकली चीजें अकेले चीन में बनाई जाती हैं।

- रिपोर्ट के अनुसार 2013 में तमाम देशों में 30.6 लाख करोड़ रुपए की नकली चीजें आयात की गईं।

- चीन सबसे ज्यादा नकल अमेरिका, इटली और फ्रांस के ब्रांड्स की करता है।

- यूरोपियन यूनियन में 5% आयातित चीजें नकली होती हैं।