बेंगलुरु: इस शख्स ने बतायी उस हैवानियत रात की कहानी

बेंगलुरु(5 जनवरी): 31 दिसंबर की रात रेजिडेंसी रोड पर एक पांच सितारा होटल में एक इवेंट खत्म करने के बाद 2 बाउंसरों के साथ जब एम सी अब्बास बाहर निकले तो उन्होंने नौजवानों के एक ग्रुप को बचाया।

- अब्बास बताते हैं, 'नए साल के मौके पर रेजिडेंसी रोड स्थित एक होटल में मैं एक इवेंट होस्ट कर रहा था। यह इवेंट आधी रात को खत्म हुआ। मैं घर जाने के लिए बाहर निकला और अपनी कार में बैठने लगा लेकिन जैसे ही मैं होटल से बाहर आया मुझे महिलाओं की चीख सुनायी पड़ी और तभी मैंने देखा कि कुछ महिलाएं हाथों में अपनी हाई हील की चप्पल उठाकर सड़क पर दौड़ रही थीं। ये महिलाएं ब्रिग्रेड रोड जंक्शन की तरफ से मेयो हॉल की तरफ आ रही थीं। मैं देखा कि बाहर जबरदस्त शोरगुल हो रहा है। 25-30 आदमियों के एक ग्रुप ने 5 लड़कियों और 3 लड़कों को घेर रखा था। उपद्रवियों का वह झुंड उन लड़के-लड़कियों को गालियां दे रहे थे और उनकी बेईज्जती कर रहे थे। उनमें से कई लोग नशे में धुत थे। मैं तुरंत होटल के अंदर गया और 2 बाउंसरों को बुलाकर लाया जिन्होंने मुझे मेरी कार तक पहुंचाया। इसके बाद हम तीनों लोग वहां घटनास्थल पर पहुंचे और उन महिलाओं की मदद की।

मैं जोर से चिल्लाया। कई लोगों को चेतावनी भी दी। जब मैंने और उन बाउंसरों ने कहा कि हम पुलिस को बुलाएंगे तब वे लोग चुपचाप वहां खड़े लोकर हमें घूरते रहे। ऐसा लग रहा था मानो उन्हें ये सब करने से कोई रोक ही नहीं सकता। जब वे दोनों बाउंसर उन बदमाशों पर नजर रखे हुए थे तब मैंने उन लड़के-लड़कियों को वहां से बचाया। वे लोग अपने घर जाने के लिए परेशान थे। मैंने उनसे कहा कि मैं कैब बुक करके उन्हें घर भेज दूंगा। तब उन्होंने बताया कि उन्होंने कैब पहले से बुक कर रखी है तो मेयो हॉल के पास उनका इंतजार कर रही है।

मैं अंदाजा भी नहीं लगा सकता कि अगर हमने उन नौजवानों की मदद नहीं की होती तो उनके साथ आगे और क्या कुछ होता। उस पूरी सड़क पर कहीं कोई पुलिसवाला नहीं था। आसपास जो लोग मौजूद थे वे सिर्फ तमाशा देख रहे थे और वे गुंडे लड़कियों को भद्दी भद्दी गालियां दे रहे थे। मैं कोई सुपरमैन या हीरो नहीं हूं जो उन 25-30 गुंडों की एकसाथ पिटाई कर देता। मुझे कुछ भी हो सकता था। लेकिन फिर भी मैंने एक कदम उठाया और उन लोगों को बचाया। अगर सभी लोग इस तरह से सोचे तो महिलाओं के खिलाफ अपराध में कुछ कमी जरूर आ सकती है।'