बेनामी संपत्ति: नए कानून से परेशान लोग कर रहे हैं 'बेनाम' पूछताछ

नई दिल्ली(26 नवंबर): नोटबंदी के बाद पीएम मोदी इशारा कर चुके हैं कि उनका अगला निशाना बेनामी संपत्ति पर होगा। बेनामी सौदों को रोकने के लिए बनाया गया कानून 1 नवबंर से प्रभाव में आ चुका है। नए सख्त कानूनों के बाद से लोग प्रॉपर्टी जब्त होने से बचाने के लिए लॉ फर्म्स का सहारा लेने की सोच रहे हैं लेकिन जांच के डर से वह वकीलों से सीधे बात भी नहीं कर रहे हैं।

- वरिष्ठ वकील परिमल श्रॉफ ने बताया, 'ब्लैक मनी पर कार्रवाई के बाद लोगों में डर बैठ गया है कि अब अगला निशाना बेनामी संपत्ति पर होगा। लोग पूछ रहे हैं कि नए कानून के तहत सरकार किस हद तक ऐक्शन ले सकती है। लोग पूछ रहे हैं कि कैसे नए कानून में प्रॉपर्टी जब्त होने से बचाई जा सकती है।' 

- बेंगलुरु की लॉ फर्म के वरिष्ठ मेंबर ने बताया, 'मुझे बेनामी कॉल्स आ रही हैं। प्रॉपर्टी जब्त होने के डर से क्लाइंट असली पहचान भी नहीं बता रहा है।'

- सरकार ने अगस्त 2016 में बेनामी सौदा निषेध कानून को पारित किया था। इसके प्रभाव में आने के बाद मौजूदा बेनामी सौदे (निषेध) कानून 1988 का नाम बदलकर बेनामी संपत्ति कानून 1988 कर दिया गया है। संशोधनों के बाद सरकार को यह अधिकार है कि वह टैक्स से बचने के लिए दूसरे के नाम से खरीदी गई प्रॉपर्टी को जब्त कर सकती है। लोग वकीलों से इस बारे में पूछताछ कर रहे हैं लेकिन जांच से बचने के लिए वह दोस्तों या अन्य लोगों के नाम का सहारा ले रहे हैं।