'महाराष्ट्र में बीफ खाने की आज़ादी लेकिन काटना जुर्म'

मुंबई(6 मई): बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक महत्‍वपूर्ण आदेश में कहा है कि महाराष्ट्र में बीफ रखना अब जुर्म नहीं है और इस पर सजा नहीं होगी। अदालत ने कहा कि राज्य में गोहत्या अब भी गैरकानूनी है, लेकिन बाहर से बीफ मंगा सकते हैं। बाहर से बीफ मंगाना अपराध नहीं है। गौरतलब है कि महाराष्ट्र गोहत्या अभी भी अपराध घोषित है।

क्या है पूरा मामला

गौरतलब है कि इससे पहले जनवरी में बॉम्‍बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र में बीफ पर विस्तृत पाबंदी लगाने वाले कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रखा था। राष्ट्रपति ने पिछले साल फरवरी में महाराष्ट्र पशु संरक्षण (संशोधन) कानून 1976 को मंजूरी दी थी। वर्ष 1976 के वास्तविक कानून में गौकशी पर पाबंदी लगाई गई थी जबकि संशोधित कानून में सांडों के वध के साथ बीफ रखने तथा खाने पर भी रोक लगा दी गई। वध के लिए पांच साल की सजा और दस हजार रुपये के जुर्माने का प्रावधान है जबकि बीफ रखने पर एक साल की सजा और दो हजार रुपये के जुर्माने का प्रावधान रखा गया था।

मुंबई निवासी आरिफ़ कपाड़िया और जाने-माने वकील हरीश जगतियानी ने इस क़ानून के उस प्रावधान को चुनौती दी थी जिसके तहत अपने पास बीफ़ रखना भी एक अपराध था। कपाड़िया और जगतियानी का कहना था कि इस तरह का प्रतिबंध सरासर ग़लत और मुंबई के बहु-सांस्कृतिक ढाँचे के ख़िलाफ़ है, क्योंकि यहां हर धर्म और समाज के लोग रहते है, जिनमें से कई गोमांस खाना चाहते हैं।

इस क़ानून को मूलभूत अधिकारों का हनन बताते हुए चुनौती देने के लिए वकील विशाल सेठ और छात्रा शायना सेन ने भी याचिका दायर की थी। शुक्रवार को हुई सुनवाई में उच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र पशु संरक्षण (संशोधन) क़ानून को क़ायम रखते हुए उसके कुछ प्रावधानों को ख़ारिज कर दिया।