शराब के लिए बिहार में क्या क्या नहीं किया जा रहा?

नई दिल्ली (9 अप्रैल) :  बिहार में शराबबंदी का तोड़ ढूंढने के लिए नए नए तरीके ढूंढे जा रहे हैं। क़ानून की नज़रों से बचकर शराब इधर-उधर ले जाने के लिए क्या क्या नहीं किया जा रहा।

द फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस ने गुरुवार को एक ऐसे शख्स को पकड़ा जो मरीज होने का नाटक कर एंबुलेंस में जा रहा था। साथ में एक आदमी उसके अटेंडेंट का स्वांग कर रहा था। एंबुलेंस से छह शराब की बोतलें मिलीं जो पूर्णिया ले जाई जा रही थीं। एंबुलेंस के ड्राइवर को  भी गिरफ्तार कर लिया गया। ये लोग पश्चिम बंगाल के सिलिगुड़ी से कथित तौर पर बिहार शराब ला रहे थे।  

ऐसी भी रिपोर्ट हैं कि कुछ लोग गया और कोडरमा के बीच लोकल ट्रेन्स में दूध के डब्बों में शराब छुपा कर ले जा रहे हैं। मधुबनी में पुलिस ने टॉयलेट से 51 बोतल शराब ज़ब्त की। कटाहारा में एक नहर मे ड्रम में छुपाकर रखी शराब पुलिस ने ज़ब्त की। पचगाछिया में एक घर में छापे के दौरान 6 लाख रुपये की शराब ज़ब्त की गई।

बिहार पुलिस ने शुक्रवार शाम को 700 जगह छापे मार कर 15000 लीटर देसी शराब और 2500 लीटर भारत निर्मित्त विदेशी शराब पकड़ी गई। शराबबंदी क़ानून के प्रावधानों के तहत 970 लोगो को जेल भेजा जा चुका है।

सूत्रों के मुताबिक बिहार एक्साइज़ डिपार्टमेंट के मुताबिक उत्तर प्रदेश एक्साइज़ की ओर से सूचित किया गया है कि बिहार के कैमूर से लगते चदौली ज़िले में शराब की बिक्री में पिछले कुछ दिनों में भारी इज़ाफ़ा हुआ है। ऐसी भी रिपोर्ट हैं कि नेपाल से शराब तस्करी के ज़रिए बिहार लाई जा रही है।  

अभी तक शराब के आदि 600 से अधिक लोगों को नशा मुक्ति केंद्रों में काउंसलिंग के लिए लाया गया। पटना के डीएम संजय कुमार अग्रवाल के मुताबिक अभी डिएडिक्शन सेंटर पर 30 बेड्स मौजूद हैं। जबकि दूसरे ज़िलों में ऐसे सेंटर्स में 10 बेड्स की ही सुविधा है। ऐसे ज़्यादातर लोग शरीर में ऐंठन, उनींदापन की शिकायत कर रहे हैं।