इस सरकारी दफ्तर में 'लिफ्ट' नहीं इस्तेमाल कर सकते स्वीपर्स!

नई दिल्ली (4 जून): एक तरफ आम तौर पर 'समानता' के अधिकार को लेकर बहस होती है। न्यायपालिका लोकतंत्र के इस मूल्य की बड़े स्तर पर रक्षा करती आई है। इसी बीच एक खबर आई है कि बार काउंसिल ने एक ऐसा नोटिस जारी किया है, जिसमें इस संवैधानिक मूल्य की भावना का कथित तौर पर 'उल्लंघन' किया गया है।

'स्कूपव्हूपडॉटकॉम' की रिपोर्ट के मुताबिक, 'बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई)' की तरफ से एक नोटिस जारी किया गया है। जिसमें लिखे तीन नियम काफी भेदभावपूर्ण हैं। जो सामाजिक ढ़ांचे की वकालत करता है। जो खासतौर पर लोगों को बताता है कि लिफ्ट का इस्तेमाल करना उन लोगों का विशेषाधिकार नहीं है, जो आधिकारिक रैंक में ऊंचे दर्जे पर नहीं हैं।

बार काउंसिल की तरफ से जारी इस आदेश में लिखा है-

1. असिस्टेंट सेक्रेटरी की रैंक से नीचे के दर्जे का स्टाफ मेंबर या 50 साल की उम्र से कम का व्यक्ति (अस्वस्थ या फिर विकलांग नहीं है), अगर 'लिफ्ट' का इस्तेमाल करते हुए पाया जाता है। तो उसकी एक दिन की 'हाज़िरी' काट ली जाएगी।  

2. स्वीपर्स या दूसरे आउटसोर्स्ड एम्प्लॉईज़ अगर बार काउंसिल ऑफ इंडिया के किसी सम्मानित सदस्य/स्टाफ की तरफ से लिफ्ट का इस्तेमाल करते हुए पाए जाते हैं। तो अकाउंट डिपार्टमेंट की तरफ से एक दिन की सैलरी काट ली जाएगी।

3. बाहरी लोगों (वरिष्ठ वकील और सम्मानित जजों के अलावा) को लिफ्ट का इस्तेमाल करने की मंजूरी नहीं है। अगर कोई भी बाहरी व्यक्ति 50 साल से कम उम्र का (अस्वस्थ या विकलांग नहीं है), अगर लिफ्ट का इस्तेमाल करते हुए पकड़ा जाता है, तो लिफ्ट इस्तेमाल करने के लिए 50 रुपए देने होंगे।