अमीरों को ज्यादा कैश दे रहे बैंक!

नई दिल्ली(16 दिसंबर): एटीएम के बाहर कतारें कैश की कमी की वजह से नहीं बल्कि बैंकों के भेदभावपूर्ण रवैए के कारण लग रही हैं। एक अधिकारी ने बताया कि रिजर्व बैंक से बैंकों को कैश मिल रहा है और वे इसे एटीएम में डालने के बजाय कैश को अपने पास रख रहे हैं ताकि अपने धनी ग्राहकों को दे सकें।

- देशभर के एटीएम नेटवर्क को मैनेज करने और उनमें कैश ट्रांसपॉर्ट करने वाली कंपनियों का कहना है कि रिजर्व बैंक द्वारा सिस्टम में जितनी करंसी सप्लाई की जा रही है उन्हें उसके 10 फीसदी से भी कम करंसी मिल रही है। देश में तकरीबन 2.2 लाख एटीएम में नए करंसी नोट निकालने के लिहाज से सुधार कर दिया गया है, लेकिन करंसी को बैंक अपने पास रख रहे हैं जिसके कारण एटीएम में कैश नहीं डाला जा पा रहा है। लोगों की परेशानी दूर करने के लिए बैंकों को सरकार ने चेतावनी दी है और वे इस तरह की प्रक्रिया न अपनाएं और एटीएम में भी कैश उपलब्ध कराएं।

- आर्थिक मामलों के सचिव शशिकांत दास ने कहा कि एटीएम में पैसा डालने के बजाय बैंक अपने ग्राहकों को सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने कहा, 'ज्यादातर एटीएम चल रहे हैं। यह कहना सही नहीं है कि केवल 13 फीसदी एटीएम काम कर रहे हैं। बैंकों को हमने एटीएम में भी पैसा डालने के लिए कहा है।'

- पीएम मोदी द्वारा नोटबंदी की घोषणा के एक माह बाद भी वापस लिए गए 500 और 1000 रुपये के नोटों की भरपाई करने के लिए पर्याप्त कैश नहीं है। वहीं संभव है कि आरबीआई भी डिजिटल ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने के लिए जानकर भी कम कैश जारी कर रही है। इसके साथ ही बैंक भी अपने ग्राहकों को कैश देने में प्राथमिकता दे रहे हैं।

- बड़े एटीएम नेटवर्क को मैनेज करने वाली एक कंपनी के एक अधिकारी ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर बताया, 'शुरू में हमें कैश नहीं मिल रहा था क्योंकि सप्लाई में कमी थी लेकिन अब कैश की सप्लाई काफी बढ़ी है लेकिन देश के एटीएम अभी भी सूखे पड़े हैं। इसका बड़ा कारण यह है कि बैंक कैश अपने पास रख रहे हैं और हमें नहीं दे रहे हैं।'