बैंकों ने ठुकराया विजय माल्या का यह ऑफर

नई दिल्ली (7 अप्रैल): बैंकों के 9 हजार करोड़ रुपये के कर्जदार उद्योगपति विजय माल्या को फिलहाल राहत मिलती हुई नजर नहीं आ रही है। सुप्रीम कोर्ट ने माल्या को 21 अप्रैल तक व्यक्तिगत तथा पारिवारिक संपत्ति का पूरा ब्यौरा पेश करने का आदेश दिया।

भारतीय स्टेट बैंक के नेतृत्व वाले समूह (कंसोर्टियम) ने न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ एवं न्यायमूर्ति रोङ्क्षहगटन फली नरीमन की पीठ को अवगत कराया कि बैंकों ने माल्या का चार हजार करोड़ रुपये 30 सितंबर तक लौटाने का प्रस्ताव नामंजूर कर दिया है। कंसोर्टियम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने न्यायालय को बताया कि यहां तक कि माल्या की ओर से कल एक संशोधित प्रस्ताव भी आया था, वह भी बैंकों को मंजूर नहीं है और उन्हें (माल्या को) अपनी प्रामाणिकता साबित करने के लिए पर्याप्त राशि अदालत के समक्ष जमा करानी चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार की बातचीत शुरू की जा सके।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह बैंकों की दलील से प्रथम दृष्ट्या सहमत हैं। इसके बाद पीठ ने माल्या के वकील सी वैद्यनाथन को कहा कि वह सूचित करें कि उनके मुवक्किल कब तक भारत लौट सकते हैं। साथ ही न्यायालय ने माल्या को 21 अप्रैल तक देश और विदेश में अपने व्यक्तिगत और पारिवारिक (पत्नी और बच्चों की) चल, अचल, विवादित और गैर-विवादित सम्पत्तियों और शेयरों का सम्पूर्ण ब्यौरा पेश करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 26 अप्रैल को होगी। कंसोर्टियम में स्टेट बैंक सहित 17 बैंक शामिल हैं।