बैंकों से कर्ज लेकर नहीं चुकाने वाले डिफाल्टरों के खिलाफ वसूली की कारवाई हुई तेज

मनीष कुमार, न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (11 सितंबर): बैंकों से कर्ज लेकर नहीं चुकाने वाले डिफाल्टरों को बैंकों का पैसा वापस करना ही होगा। सरकार ने इन डिफाल्टरों से वसूली की कारवाई में और अधिक तेजी लाने का फैसला किया है। वित्त मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक इस वित्तीय वर्ष की दूसरी तिमाही में बैंकों द्वारा डिफाल्टरों से की जाने वाले बकाये की रिकवरी में और सुधार आने की उम्मीद है।

प्रापर्टी की निलामी के लिये ई-ऑक्शन बाजार

वित्त मंत्रालय ने सार्वजनिक क्षेत्र के सभी बैंकों और इंडियन बैंक एसोसियेशन (आईबीए) से बैंक डिफॉल्टरों की प्रॉपर्टी की नीलामी के लिए कॉमन ई-ऑक्शन वेबसाइट बनाने को कहा है। जिसपर डिफॉल्टरों के प्रॉपर्टी की नीलामी की जा सके। ये ई-ऑक्सऩ वेबसाइट सभी बैंकों के लिए कॉमन वेबसाइट होगा। जिन डिफाल्टरों की प्रॉपर्टी की नीलामी होगी वो इसी वेबसाइट के जरिये की जायेगी और और प्रॉपर्टी के खरीददार इसी वेबसाइट पर बोली लगायेंगे। फिलहाल हर बैंक खुद से डिफाल्टरों की प्रॉपर्टी की नीलामी करते हैं जिसकी जानकारी ना तो खरीददारों को मिल पाती है और ना प्रॉपर्टी का सही कीमत मिल पाती है। लेकिन इस ई-ऑक्शन वेबसाइट के जरिये उम्मीद की जा रही है कि बैंकों को प्रॉपर्टी की सही कीमत मिल सकेगी जिससे बैंकों को अपना बकाया पैसा मिल सकेगा। ई-ऑक्शन वेबसाइट पर निलामी होने से नीलामी प्रक्रिया के खर्चो में भी कटौती होगी साथ ही निलामी प्रक्रिया को पारदर्शी भी बनाने में मदद मिलेगी।

संपत्ति जब्त करने में लाई जाये तेजी

कोर्ट के आदेश के बाद बैंकों के डिफॉल्टरों की संपत्ति को जब्त करने के 10,000 आवेदन जिलाधिकारियों के पास लंबित पड़े हैं लेकिन बैंकों के इस आवेदन पर जिलाधिकारी कुंडी मार कर बैठे हैं। इन संपत्तियों का वैल्यू करीब 40,000 करोड़ रुपये आंका गया गया है। जिलाधिकारियों के पास बैंकों के इन पेंडिंग आवेदनों को लेकर वित्त मंत्रालय भी चिंतित है। और इसी के चलते केंद्र सरकार ने  जिला अधिकारियों से कहा है कि वे बैंकों के डिफॉल्टरों के संपत्ति को जब्त करने की प्रक्रिया में तेजी लायें। यही नहीं केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों से भी यह सुनिश्चित करने को कहा है कि बैंकों द्वारा डिफॉल्टरों की संपत्तियों को जब्त करने में जिलाअधिकारी मदद करें।