बांग्लादेश: 1971 के युद्ध अपराधों के लिए 'जमात-ए-इस्लामी' मुखिया को होगी फांसी

नई दिल्ली (6 मई): बांग्लादेश में चरमपंथी संगठन जमात-ए-इस्लामी के मुखिया मोती-उर-रहमान निज़ामी को कभी भी फांसी पर लटकाया जा सकता है। बांग्लादेश के सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को मौत की सज़ा के खिलाफ उनकी अंतिम अपील को खारिज़ कर दिया। उन्हें यह सज़ा पाकिस्तान के साथ 1971 के युद्ध के समय के अपराधों के लिए दी गई है।

'बिजनेस स्टैंडर्ड' की रिपोर्ट के मुताबिक, चीफ जस्टिस सुरेंद्र कुमार सिन्हा की अगुवाई वाली चार सदस्यीय डिवीजन बेंच ने तनावपूर्ण अदालत में सिर्फ एक शब्द का फैसला सुनाया- "डिसमिस्ड"।

सिन्हा, मुस्लिम बहुल देश में इस पद पर पहुंचने वाले पहले हिंदू हैं। अधिकारियों ने कहा कि विस्तृत आदेश बाद में जारी किया जाएगा। निज़ामी पर हत्या, बलात्कार और शीर्ष बौद्धिक लोगों की हत्या कराने के आरोप सिद्ध किए गए हैं। ये आरोप 1971 में आज़ादी के लिए हुए युद्ध के समय के हैं। निज़ामी को अक्टूबर 2014 में मौत की सज़ा दी गई थी। उनपर "बडी जिम्मेदारी" साबित की गई। क्योंकि वह 1971 में बदनाम 'अल बद्र' फोर्स के मुखिया थे।