बांग्लादेश ने हूजी सरगना और उसके दो सहयोगियों को दी फांसी

नई दिल्ली ( 13 अप्रैल ):  बांग्लादेश ने प्रतिबंधित हरकत उल जिहाद अल इस्लामी के प्रमुख मुफ्ती अब्दुल हन्नान और उसके दो सहयोगियों को एक दरगाह पर वर्ष 2004 में हमला करने के मामले में आज रात फांसी दे दी।


इस हमले में तीन लोगों की मौत हो गई थी और ब्रितानी उच्चायुक्त घायल हो गए थे। मीडिया रिपोर्ट में गृह मंत्री असदुज्जमन खान के हवाले से बताया कि हन्नान को उसके सहयोगी शरीफ शाहेदुल उर्फ बिपुल के साथ काशिमपुर जेल में रात 10 बजकर एक मिनट पर फांसी पर लटकाया गया।


हूजी के एक और आतंकी दिलावर हुसैन को सिलहट जेल में सूली पर लटकाया गया। राष्ट्रपति अब्दुल हामिद ने पिछले हफ्ते इनकी दया याचिका ठुकरा दी थी।


मंत्री ने बताया कि उसके सहयोगी देलवार हुसैन रिपोन को सिलहट जेल में फांसी पर लटकाया गया। गाजीपुर पुलिस अधीक्षक हारन उर राशिद ने कहा कि हन्नान और बिपुन के शव का पोस्टमार्टम कर दिया गया है और उनके शवों को कड़ी सुरक्षा के बीच उनके गावों में भेजा जाएगा। बांग्लादेश के राष्ट्रपति अब्दुल हामिद ने उनकी दया याचिकाएं खारिज कर दी थीं।


इससे पहले अधिकारियों ने काशिमपुर जेल में और इसके आसपास सुरक्षा बढ़ा दी थी। हन्नान की पत्नी, उसकी दो बेटियों और बड़े भाई ने आज सुबह जेल में उससे मुलाकात की। रिपोन के परिवार के सदस्यों ने भी जेल में उससे मुलाकात की।


सुप्रीम कोर्ट ने हन्नान और दो अन्य को मृत्युदंड दिए जाने का समर्थन करने के अपने पूर्ववर्ती आदेश की 19 मार्च को पुन: पुष्टि की थी।


सिलहट में हजरत शाहजलाल की दरगाह पर हुए ग्रेनेड हमले में बांग्लादेश में जन्मे तत्कालीन ब्रितानी उच्चायुक्त अनवर चौधरी बाल बाल बचे थे। इस हमले में तीन पुलिसकर्मियों की मौत हो गई थी और 70 अन्य घायल हो गए थे।