INSIDE STORY: #Balochistan को लेकर ब्रिटेन में प्रदर्शन, खंड-खंड होने की कगार पर पहुंचा पाक...

डॉ. संदीप कोहली

नई दिल्ली (29 अगस्त): बलूचिस्तान को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन के बाद दुनियाभर में बलूचिस्तान का मुद्दा जोर पकड़ने लगा है। अमेरिका, कनाडा, जर्मनी, फ्रांस और अब ब्रिटेन बलूचिस्तान की आजादी का आंदोलन चरम पर है। लंदन में रविवार बलूचिस्तान को लेकर प्रदर्शन हुए जिसमें 'पीएम मोदी फॉर बलूचिस्तान' और 'कदम बढ़ाओ मोदी जी हम तुम्हारे साथ हैं' जैसे नारे लगाए गए। 

खंड-खंड होने की कगार पर कैेसे पहुंचा पाकिस्तान, बलूचिस्तान और पीओके के बाद सिंध ने भी पाक से मांगी आजादी... बलूचिस्तान की आजादी के बाद पीओके, गिलगित-बल्तिस्तान और सिंध में भी आजादी की मांग ने जोर पकड़ लिया है। लंदन में हुए प्रदर्शन में बलूचिस्तान की आजादी की मांग के साथ-साथ 'सिंधुदेश' की आजादी की मांग भी उठनी शुरू हो गई है। लंदन में चीनी दूतावास के बाहर प्रदर्शन के दौरान पाकिस्तान के खिलाफ सिंध प्रांत के लोगों ने जमकर नारेबाजी की। बलोच नेताओं के साथ मिलकर सिंधी नेताओं ने दूतावास के सामने पाक-चीन इकॉनामिक कॉरिडोर के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।

सिंध में लगे ‘आजादी’ के नारे- गिलगित, पीओके और बलूचिस्तान के बाद अब पाकिस्तान के सिंध प्रांत में ‘आजादी’ के नारे लगाए गए हैं। सिंध प्रांत में प्रदर्शनकारियों ने अलग ‘सिंधुदेश’ की मांग करते हुए यह नारेबाजी की। पाकिस्तान के मीरपुर खास में यह प्रदर्शनकारी अपनी मांग को लेकर इकट्ठा हुए थे।

लंदन में पाक-चीन साझेदारी के खिलाफ लगे नारे- लंदन स्थित चीनी दूतावास के बाहर पाक-चीन इकनॉमिक कॉरिडोर के खिलाफ बलूच और सिंधी नेताओं ने प्रदर्शन किया। बलूच नेता नूरदीन मेंगल की अगुवाई में यह प्रदर्शन हुआ। नूरदीन ने कहा कि पाकिस्तान और चीन को बताना चाहता हूं कि वे बलूच लोगों की सहमति के बिना बलूचिस्तान में कुछ नहीं कर सकते। वहीं दूसरी ओर विश्व सिंधी कांग्रेस के अध्यक्ष लखु लुहाना ने कहा कि हम पाक-चीन इकनॉमिक प्रॉजेक्ट को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे।

जर्मनी में नवाज सरकार के खिलाफ हुआ प्रदर्शन- आपको बता दें कि इससे पहले जर्मनी में शनिवार को दर्जनों निर्वासित बलूचियों ने बलूचिस्तान के समर्थन में रैली आयोजित की। इस रैली की खास बात यह थी कि कार्यकर्ता अपने हाथों में भारतीय तिरंगा पकड़कर लहरा रहे थे इतना ही नहीं वे पाकिस्तान विरोधी और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन में नारे लगाते भी नजर आए थे। रैली के दौरान प्रदर्शकारियों ने पाक सेना के विरोध में नारेबाजी करते हुए कहा कि तुम कितने बुगती मारोगे, हर घर से बुगती निकलेगा।

बलूचिस्तान-अफगान सीमा पर जला पाक झंडा, लगे ‘भारत-भारत’ के नारे- पीएम मोदी ने बलूचिस्तान के समर्थन में बातें क्या कही बलूचिस्तान सहित अफगानिस्तान सीमा से सटे इलाकाई क्षत्रों में लोगों में गजब का उत्साह है। लोग वहीं गुटों में बैठक कर पाकिस्तान के विरोध व भारत के समर्थन में नारे लगा रहे हैं। इन हालातों से पाकिस्तान की मुश्किलें सहज देखीं जा रहीं हैं। पाकिस्तान ने झंडा जलाए जाने व भारत के पक्ष में नारेबाजी लगाए जाने से भड़क गया है। अफगान-बलूचिस्तान सीमा पर लगते एक गेट को बंद कर दिया है।

आइए जानते हैं कि आखिर क्या है बलूचिस्तान का पूरा विवाद और यहां के लोग क्यों चाहते हैं पाकिस्तान से आजादी...

- बलूचिस्तान ईरान और पाकिस्तान के बीच का हिस्सा है।  - बलूचिस्तान पूरे पाकिस्तानी प्रांत का 44 फिसदी हिस्सा है। - पर यहां पाक की कुल आबादी के मात्र 5 फिसदी लोग रहते हैं। - 19 करोड़ पाक आबादी में से 1.3 करोड़ लोग ही यहां रहते हैं। - पाकिस्तान में 7 करोड़ मतदाताओं में से सिर्फ 40 लाख वोटर बलूचिस्तान में हैं। - नेशनल एसेंबली की 342 सीटों में बलूचिस्तान से सिर्फ 17 सीटें बलूचिस्तान में हैं। - जिनमें से 14 सामान्य हैं और तीन महिलाओं के लिए सुरक्षित हैं। - बलोच, बलूचिस्तान प्रान्त में रहने वाले मुख्य लोग है।  - इनकी भाषा भी बलोच है जो ईरानी भाषा से मिलती जुलती है। - इसमें प्राचीन अवस्ताई भाषा की झलक मिलती है  - जो वैदिक संस्कृत की बड़ी करीबी भाषा मानी जाती है। - बलोच लोग कबीलों में पहाड़ी और रेगिस्तानी क्षेत्रों में रहते हैं। - बलूचिस्तान में खनिज और गैस प्रचुर मात्रा में पाई जाती है। - इसी पर कब्जे को लेकर पाकिस्तानी सेना वहां जुर्म ढहा रही है। - 1948, 1958-59, 1962-63 और 1973-77 में यहां सैन्य अभियान चलाए। - कब्जे के बावजूद यह सूबा है पूरी तरह से कभी पाक हुकूमत के कब्जे में नहीं रहा। - बलूचिस्तान में पाकिस्तान सरकार की नहीं कबीलाई सरदारों की चलती है।  - धूल भरी आंधी, रेतीला इलाका, बंजर जमीन और कबीले ये बलूचिस्तान की असली तस्वीर है।  - इन कबीलों का अपना कानून है, इसमें हाथ के बदले हाथ और सिर के बदले सिर लेने की परंपरा है।  - आजादी की मांग तो 1948 से ही उठाई जा रही है, लेकिन 2000 के बाद से आग और भड़क गई। - यही वजह है कि कई बलूच नेताओं को दूसरे देशों में शरण लेनी पड़ रही है।

बलूचिस्तान का इतिहास... ब्रिटिश राज में बलूचिस्तान ब्रिटिश इंडिया में ही आता था। अंग्रेजी हुकूमत के वक्त बलूचिस्तान चार रियासतों में बंटा हुआ था। मकरान, लसबेला, खरान और कलात। इनमें खारन और लसबेला पर कलात के खान ही राज करा करते थे। 1947 में भारत की आजादी के बाद बलूचिस्तान पाकिस्तान के हिस्से में आया था।

1947 से पहले- 1839 में पहली बार ब्रिटिश बलूचिस्तान में घुसे थे। 1869 में कलात रियासत ने ब्रिटिश आधिपत्य को स्वीकार कर लिया था। आजादी की जंग में 1931 में कलात स्टेट नेशनल पार्टी का जन्म हुआ। लेकिन खानों के समूह Khanate ने इसे खारिज कर दिया। फिर 1939 में दो पार्टियों का जन्म हुआ। पहली प्रो इंडियन नेशनल कांग्रेस अंजुमन और दूसरी वतन मुस्लिम लीग थी। 4 अगस्त 1947 को कलात ने अपने आप को आजाद घोषित कर दिया।

1947 से बाद-पाकिस्तान बनने से तीन महीने पहले मोहम्मद अली जिन्ना ने कलात के अधीन पूरे बलूचिस्तान की स्वतंत्रता और उसके पाकिस्तान में विलय पर अंग्रेजी हुकूमत से बातचीत की। जिन्ना, 'खान आफ कलात' मीर अहमद यार खान और वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन के बीच कई दौर बैठक हुई।

जिन्ना ने दिया कलात के खानों को धोखा-फरवरी, 1948 में खान को लिखे पत्र में जिन्ना ने कहा, मैं आपको सलाह देता हूं कि अब बिना देर किए कलात का पाक में विलय कर दीजिए। कुछ समय बाद खान ने पत्र का जवाब दिया, जिसमें कहा गया कि विलय के मसले पर संसद के दोनों सदनों की बैठक बुलाई गई है। जो राय बनेगी, आपको सूचित कर दी जाएगी।

जिन्ना ने कब्जे के लिए सेना भेजी-मीर अहमद यार खान ने इस पर आपत्ति जताई और दलील दी कि पाकिस्तान ने समझौते का उल्लंघन किया है। मोहम्मद अली जिन्ना ने 26 मार्च 1948 को बलूचिस्तान को कब्जे में करने के लिए थल और वायुसेना भेजी। सेना बलूचिस्तान के तटीय इलाकों पासनी, जिवानी और तुरबत में घुस गई। सेना और वायुसेना ने कलात के शासकों को हराकर राजधानी क्वेटा पर कब्जा कर लिया।

1948 में पाकिस्तान सरकार के खिलाफ फूंका बिगुल-मई 1948 में अब्दुल करीब खान ने पाक सरकार के खिलाफ अलगाव का बिगुल फूंका और अफगानिस्तान से पाक सैनिकों के खिलाफ गुरिल्ला युद्ध छेड़ दिया जो अब तक जारी है।

1960 में विद्रोह-14 अक्टूबर 1955 कलात को पाकिस्तान में शामिल कर लिया गया। लेकिन 1960 के दशक में नवाब नवरोज खान ने विद्रोह का बिगुल फूंक दिया और पाकिस्तान के खिलाफ जंग शुरू कर दी, लेकिन 15 मई 1959 को नवाब नवरोज खान ने हार स्वीकार कर ली और पाकिस्तान सरकार के साथ समझौता किया। नवरोज खान के बेटों और भतीजों को फांसी दे दी गई। नवाब की भी 1964 में जेल के अंदर ही मौत हो गई।

बलूचिस्तान में नरसंहार-1970 में बलूचिस्तान में गृह युद्ध छिड़ गया। गुल खान नासिर और अकबर खान बगुती जैसे बड़े बलोच नेता इसकी अगुवाई कर रहे थे। गृह युद्ध के दौरान पाक सेना ने बलूचिस्तान में नरसंहार मचा दिया। नेताओं को जेलों में ठूस दिया गया। विद्रोहियों को चुन-चुन कर मारा गया। मरने वालों का आंकड़ा 6 हजार पहुंच गया था। पाकिस्तानी राष्ट्रपति याह्या खान ने बलूचिस्तान को पाक का चौथा राज्य घोषित कर दिया।

मार्शल लॉ किया लागू-जुल्फिकार भुट्टो ने 1973-74 के दौरान वहां मार्शल लॉ लागू कर दिया और वहां कि सरकार को बर्खास्त कर दिया। उस दौरान बलूचिस्तानी आंदोलनकारियों के ऊपर दमनात्मक कार्रवाई भी हुई और 7 से 8 हजार बलूचिस्तानी जनता को अपनी जान गंवानी पड़ी। लेकिन साथ ही साथ पाकिस्तान की सेना के भी चार सौ से ज्यादा जवान मारे गये।

पाकिस्तानी सेना ने किया बलुचिस्तान में नरसंहार... - कबीलों के कब्जे वाले 95 फीसदी क्षेत्र को 'B एरिया' कहा जाता है  - जबकि 5 फीसदी के बाकी इलाके को 'A एरिया' कहते हैं।  - इस इलाके पर पाकिस्तान पुलिस और सेना का कब्जा है।  - पाकिस्तान B एरिया को A में तब्दील करना चाहता है। - इसके लिए जोर जबरदस्ती के चलते बलूचिस्तान में विरोध की आग भड़क चुकी है। - बलूचिस्तान के लोग अब पाकिस्तान से अलग देश की मांग करने लगे हैं।  - हर साल बलूचिस्तान में 27 मार्च को काला दिन मनाया जाता है।  - बलूच नेता बलाच पुरदली ने खोली पाकिस्तान की पोल। - पुरदली के मुताबिक पाकिस्तान अब तक करीब 19 हजार बलूचियों को मार चुका है।

अलग-अलग संस्थाओं की रिपोर्ट खोलती है पोल- - यूएनपीओ (UNREPRESENTED NATIONS AND PEOPLES ORGANIZATION) की रिपोर्ट के मुताबिक 1948 के बाद से अब तक हजारों लोग मारे जा चुके हैं और लाखों बेघर हो चुके हैं।

- यूएन की रिपोर्ट के मुताबिक 33 हजार बलोच बच्चे विकलांग हो चुके हैं। 8 से 10 बच्चे रोजाना भूखमरी की वजह से मर रहे हैं। सैंकड़ों स्कूल बमबारी में बर्बाद हो चुके हैं। 2006 में 84 हजार लोग जिसमें 26 हजार महिलाएं और 33 हजार बच्चे डेरा बुगती और कोह्लू से पलायन कर चुके हैं।

- पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग के मुताबिक (Human Rights Commission of Pakistan) पाकिस्तानी सेना की कार्यवाही में 2.5 लाख लोग डेरी बुगती से पलायन कर चुके हैं और 10 हजार लोग भूखमरी का शिकार हुए हैं।

- पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग के मुताबिक (जून 2011 की रिपोर्ट में कहा है कि 140 लापता व्यक्तियों के शव जुलाई 2010 से मई 2011 के बीच बरामद हुए हैं।हाल ही में सुरक्षा बलों की तरफ से बलूच लोगों और नेताओं की हत्याओं ने इस क्षेत्र में तनाव बढ़ाया है