आजादी के लिए इस देश ने मांगी भारत से मदद

नई दिल्ली (3 अप्रैल): बलूचिस्तान दशकों से आजादी की मांग कर रहा है, बल्कि सच्चाई ये है कि बलूचिस्तान ने कभी भी खुद को पाकिस्तान का हिस्सा नहीं माना है। बलूच लोग पाकिस्तान से नफरत करते हैं और काफी वक्त से आजादी के अपने आंदोलन में भारत से मदद मांग रहे हैं।

हालांकि अब पाकिस्तान ने अपने जासूसी ड्रामे में बलूचिस्तान को भी घसीट लिया है तो यहां के लोगों ने फिर भारत को कहा है कि पूरे इलाके में स्थिरता लाने के लिए भारत को बलूच को आजाद करवाने में मदद करनी चाहिए। इसी बलूचिस्तान में पिछले दिनों पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ जासूसी के ड्रामे की साजिश रची। कुलभूषण यादव नाम के भारतीय कारोबारी को पकड़कर पाकिस्तान ने उसे जासूस बता दिया। एक जर्मन राजनयिक की मानें तो दरअसल कुलभूषण को तालिबान ने किडनैप किया और फिर उसे पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी को बेच दिया। अब पाकिस्तान आरोप लगा रहा है कि बलूचिस्तान में भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ काम कर रही है। लेकिन पाकिस्तान के इस झूठ की पोल बलूचिस्तान के लोग खोल रहे हैं।

बलोच वुमेन फोरम की अध्यक्ष नायला कादरी ने गुहार लगाई है कि ‘’रॉ का बलूचिस्तान में कोई दखल नहीं है। हम अंग्रेजों से दौर से ही आजादी की जंग लड़ रहे हैं। पाकिस्तान झूठ की बुनियाद पर बना है और पाक खुद को फरेब-साजिश से चलाता है। पाक ये दिखाना चाहता है कि हम रॉ की मदद ले रहे हैं, लेकिन हमारा आंदोलन रॉ के बनने से पहले का है। ये आंदोलन तब से है जब ना पाक था, ना रॉ। हम हजारों साल से जिंदा हैं और जिंदा रहेंगे।

नायला कादरी बलोच ने ये भी कहा कि पाकिस्तान ने जो वीडियो जारी किया वो सरासर झूठा है। टॉर्चर करके किसी से कुछ भी कहलाया जा सकता है। भारत ने कभी हमारी मदद नहीं की, भारत वहां क्यों जासूस भेजेगा जहां हम सांस तक नहीं ले सकते। दरअसल अग्रेजों से आजादी की लड़ाई के दौरान भी बलूचिस्तान के स्थानीय नेता अपना अलग देश चाहते थे। लेकिन जब पाकिस्तान ने फौज और हथियार के दम पर बलूचिस्तान पर कब्जा कर लिया, तो वहां विद्रोह भड़क उठा था। वहां की सड़कों पर अब भी ये आंदोलन जिंदा है।