बलूच नेता बुगती को मिल सकती है भारत की नागरिकता

नई दिल्ली(16 सितंबर):  निर्वासित बलूच नेता ब्रह्मदाग बुगती को जल्द ही भारतीय नागरिकता मिल सकती है। इसे लेकर बुगती की भारतीय अधिकारियों से बातचीत हो चुकी है। 

- बलूच रिपब्लिकन पार्टी ने इसे लेकर 18-19 सितंबर को जेनेवा में मीटिंग बुलाई है। पाकिस्तान मीडिया के हवाले से यह खबर आई है।

- एक पाक चैनल ने बलूच रिपब्लिकन पार्टी के सूत्रों के हवाले से बताया है कि भारत बुगती व उसके सहयोगियों को नागरिकता देने के लिए सहमत हो गया है। बुगती के साथ साथ शेर मोहम्मद बुगती और अजीजुल्लाह बुगती को भी भारत में शरण की अनुमति दे सकती है।

- बुगती जल्द ही भारतीय दूतावास में शरण लेने के लिए आवेदन करेंगे। ब्रह्मदाग बुगती बलोच रिपब्लिकन पार्टी के संस्थापक हैं जिसे पाकिस्तान ने गैरकानूनी घोषित किया हुआ है।

- पाक मीडिया  ने बुगती की पार्टी में मौजूद अपने सूत्र के हवाले से कहा है कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस पर बलूचिस्तान को लेकर दिए बयान से काफी पहले यानि साल की शुरुआत में ही भारतीय अधिकारियों और बुगती के बीच नागरिकता देने की बात शुरू हो चुकी थी। उस सूत्र ने यह भी कहा है कि हम भारतीय कागजातों के आधार पर दुुनिया में घूमेंगे और पाकिस्तान के खिलाफ अभियान चलाएंगे।

- हम पीएम मोदी को उनके समर्थन के लिए खुले तौर पर धन्यवाद देते हैं और इसे लेकर हम कुछ नहीं छिपा रहे है। हमें कोई फर्क नहीं पड़ता कि हमारे विरोधी पीएम मोदी के हमारे समर्थन के बारे में क्या सोचते हैं। बुगती का मानना है कि जिस तरह तिब्बतियों के धर्म गुरु दलाई लाम भारत में शरण लेकर पूरी दुनिया में चीन के अत्याचार के खिलाफ प्रचार कर रहे हैं,उसी तरह उनका भी इरादा है। उन्हें भारत में शरण लेने में कोई समस्या नहीं होगी। 2006 में अपने दादा की हत्या के बाद ब्रह्मदाग बुगती ने डेरा बुगती छोड़ दिया था और अफगानिस्तान में शरण ली थी। जुलाई 2010 से वह स्विट्जरलैण्ड में है।

- पाकिस्तान की सरकार स्विट्जरलैण्ड पर दबाव बना रही है कि वो उन्हें नागरिकता ना दें। उन्हें इस बात का एहसास साल की शुरुआत में हुआ था और उन्हें लगा कि हो सकता है स्विस सरकार उन्हें पासपोर्ट ना दे। स्विट्जरलैण्ड सरकार ने बुगती को बताया है कि शरण लेने का मामला प्रोसेस में है और ये कब तक पूरा होगा कहा नहीं जा सकता। इसी वजह से बुगती स्विट्जरलैण्ड से बाहर नहीं जा पा रहे हैं और दुनिया भर में पाकिस्तान के अत्याचारों के खिलाफ प्रचार नहीं कर पा रहे हैं। करीब 15 हजार बलूच लोगों ने अफगानिस्तान में शरण ले रखी है और अन्य यूरोपिय देशों में फैले हैं