INSIDE STORY: UN में गूंजा 'बलूचिस्तान दूसरा बांग्लादेश' का नारा, जानिए क्यों दहशत में PAK...

डॉ. संदीप कोहली,

नई दिल्ली (14 सितंबर): बलूचिस्तान को पाकिस्तान से आजाद कराने की मांग को लेकर प्रदर्शन जंगल की आग की तरह फैल चुका है। दुनियाभर में जहां-जहां बलूच लोग रह रहे हैं वहां-वहां बलूचिस्तान की आजादी के नारे लग रहे हैं। बुधवार को यह आंदोलन संयुक्त राष्ट्र के बाहर पहुंच गया। न्यूयॉर्क में यूएन हेडक्वाटर के बाहर बलूच कार्यकर्ताओं के एक ग्रुप ने पाकिस्तान के खिलाफ जमकर नारे लगाए। 'भारत बलूचिस्तान की मदद करो' 'बलूचिस्तान की आजादी', 'बलूच लोगों का जनसंहार बंद करो', 'यूएन-यूएन कहां हो तुम', 'बलूचिस्तान दूसरा बांग्लादेश है' जैसे नारों की आवाज से पूरा यूएन हेडक्वाटर गूंज रहा था। यह विरोध प्रदर्शन फ्री बलूचिस्तान मूवमेंट (FBM) ने आयोजित किया था। गौरतलब है कि कल ही संयुक्त राष्ट्र महासभा का 71वां सत्र शुरू हुआ है, जिसमें दुनियाभर से बड़े-बड़े नेता भाग लेने न्यूयॉर्क पहुंच रहे हैं।

- प्रदर्शनकारियों ने पाक सेना पर 5000 लोगों को मारने और 20,000 लोगों को गायब करने का आरोप लगाया। - FBM का उद्देश्य बलूचिस्तान में पाक सरकार द्वारा मानवाधिकारों के उलंघन से दुनियाभर को अवगत कराना है। - FBM ने कहा, यह यूएन की जिम्मेदारी है कि वह पाकिस्तान द्वारा की जा रही क्रूरता का संज्ञान ले। - FBM के अनुसार पाकिस्तान ने 1948 से मानवाधिकारों का उल्लंघन और बेगुनाह बलूच लोगों को मारता रहा है।  - पाक सरकार ने निशाना बनाकर हत्याएं और अंधाधुंध बमबारी से हमारी जिंदगी मुश्किल बना दी है। - संयुक्त राष्ट्र महासभा के 71वें सत्र के दौरान उच्च स्तरीय आम बहस के लिए जुटने वाले हैं। - पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ 21 सितंबर को महासभा को संबोधित करेंगे।  - नवाज शरीफ के संबोधन के 5 दिन बाद विदेश मंत्री सुषमा स्वराज वैश्विक नेताओं को संबोधित करेंगी। - हालांकि अमेरिका ने एक दिन पहले ही कहा है कि वह बलूचिस्तान की आजादी का समर्थन नहीं करता।

खंड-खंड होने की कगार पर कैसे पहुंचा PAK...

बलूचिस्तान को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन के बाद दुनियाभर में बलूचिस्तान का मुद्दा जोर पकड़ने लगा है। अमेरिका, कनाडा, जर्मनी, फ्रांस और अब ब्रिटेन बलूचिस्तान की आजादी का आंदोलन चरम पर है। बलूचिस्तान को लेकर जगह-जगह प्रदर्शन हो रहे हैं। जिसमें 'पीएम मोदी फॉर बलूचिस्तान' और 'कदम बढ़ाओ मोदी जी हम तुम्हारे साथ हैं' जैसे नारे लगाए गए।

लंदन की सड़कों लगे PAK विरोधी नारे...लंदन स्थित चीनी दूतावास के बाहर पाक-चीन इकनॉमिक कॉरिडोर के खिलाफ बलूच और सिंधी नेताओं ने प्रदर्शन किया। बलूचिस्तान की आजादी के बाद पीओके, गिलगित-बल्तिस्तान और सिंध में भी आजादी की मांग ने जोर पकड़ लिया है। लंदन में हुए प्रदर्शन में बलूचिस्तान की आजादी की मांग के साथ-साथ 'सिंधुदेश' की आजादी की मांग भी उठनी शुरू हो गई है।

जर्मनी की सड़कों लगे PAK विरोधी नारे... जर्मनी के अलग-अलग शहरों में बलूचिस्तान की आजादी मांग को लेकर बलूच लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। जर्मनी के म्यूनिख में बलूच लोगों ने पीएम मोदी बलूचिस्तान लव्स यू की तस्वीरें हाथ में लेकर पाकिस्तान के खिलाफ नारे लगाए। तीन दिन पहले भी जर्मनी में पाकिस्तान के खिलाफ नारेबाजी हुई थी। इस रैली की खास बात यह थी कि कार्यकर्ता अपने हाथों में भारतीय तिरंगा पकड़कर लहरा रहे थे।

आखिर क्या है बलूचिस्तान का पूरा विवाद और यहां के लोग क्यों चाहते हैं पाकिस्तान से आजादी...

- बलूचिस्तान ईरान और पाकिस्तान के बीच का हिस्सा है।  - बलूचिस्तान पूरे पाकिस्तानी प्रांत का 44 फिसदी हिस्सा है। - पर यहां पाक की कुल आबादी के मात्र 5 फिसदी लोग रहते हैं। - 19 करोड़ पाक आबादी में से 1.3 करोड़ लोग ही यहां रहते हैं। - पाकिस्तान में 7 करोड़ मतदाताओं में से सिर्फ 40 लाख वोटर बलूचिस्तान में हैं। - नेशनल एसेंबली की 342 सीटों में बलूचिस्तान से सिर्फ 17 सीटें बलूचिस्तान में हैं। - जिनमें से 14 सामान्य हैं और तीन महिलाओं के लिए सुरक्षित हैं। - बलोच, बलूचिस्तान प्रान्त में रहने वाले मुख्य लोग है।  - इनकी भाषा भी बलोच है जो ईरानी भाषा से मिलती जुलती है। - इसमें प्राचीन अवस्ताई भाषा की झलक मिलती है  - जो वैदिक संस्कृत की बड़ी करीबी भाषा मानी जाती है। - बलोच लोग कबीलों में पहाड़ी और रेगिस्तानी क्षेत्रों में रहते हैं। - बलूचिस्तान में खनिज और गैस प्रचुर मात्रा में पाई जाती है। - इसी पर कब्जे को लेकर पाकिस्तानी सेना वहां जुर्म ढहा रही है। - 1948, 1958-59, 1962-63 और 1973-77 में यहां सैन्य अभियान चलाए। - कब्जे के बावजूद यह सूबा है पूरी तरह से कभी पाक हुकूमत के कब्जे में नहीं रहा। - बलूचिस्तान में पाकिस्तान सरकार की नहीं कबीलाई सरदारों की चलती है।  - धूल भरी आंधी, रेतीला इलाका, बंजर जमीन और कबीले ये बलूचिस्तान की असली तस्वीर है।  - इन कबीलों का अपना कानून है, इसमें हाथ के बदले हाथ और सिर के बदले सिर लेने की परंपरा है।  - आजादी की मांग तो 1948 से ही उठाई जा रही है, लेकिन 2000 के बाद से आग और भड़क गई। - यही वजह है कि कई बलूच नेताओं को दूसरे देशों में शरण लेनी पड़ रही है।

पाकिस्तानी सेना ने किए 19 हजार कत्ल

- कबीलों के कब्जे वाले 95 फीसदी क्षेत्र को 'B एरिया' कहा जाता है  - जबकि 5 फीसदी के बाकी इलाके को 'A एरिया' कहते हैं।  - इस इलाके पर पाकिस्तान पुलिस और सेना का कब्जा है।  - पाकिस्तान B एरिया को A में तब्दील करना चाहता है। - इसके लिए जोर जबरदस्ती के चलते बलूचिस्तान में विरोध की आग भड़क चुकी है। - बलूचिस्तान के लोग अब पाकिस्तान से अलग देश की मांग करने लगे हैं।  - हर साल बलूचिस्तान में 27 मार्च को काला दिन मनाया जाता है।  - बलूच नेता बलाच पुरदली ने खोली पाकिस्तान की पोल। - पुरदली के मुताबिक पाकिस्तान अब तक करीब 19 हजार बलूचियों को मार चुका है।

अलग-अलग संस्थाओं की रिपोर्ट खोलती है पोल- यूएनपीओ(UNREPRESENTED NATIONS AND PEOPLES ORGANIZATION)की रिपोर्ट के मुताबिक 1948 के बाद से अब तक हजारों लोग मारे जा चुके हैं और लाखों बेघर हो चुके हैं।

यूएनकी रिपोर्ट के मुताबिक 33 हजार बलोच बच्चे विकलांग हो चुके हैं। 8 से 10 बच्चे रोजाना भूखमरी की वजह से मर रहे हैं। सैंकड़ों स्कूल बमबारी में बर्बाद हो चुके हैं। 2006 में 84 हजार लोग जिसमें 26 हजार महिलाएं और 33 हजार बच्चे डेरा बुगती और कोह्लू से पलायन कर चुके हैं।

पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग के मुताबिक(Human Rights Commission of Pakistan) पाकिस्तानी सेना की कार्यवाही में 2.5 लाख लोग डेरी बुगती से पलायन कर चुके हैं और 10 हजार लोग भूखमरी का शिकार हुए हैं।

जून 2011 की रिपोर्ट में कहा है कि 140 लापता व्यक्तियों के शव जुलाई 2010 से मई 2011 के बीच बरामद हुए हैं।हाल ही में सुरक्षा बलों की तरफ से बलूच लोगों और नेताओं की हत्याओं ने इस क्षेत्र में तनाव बढ़ाया है।