सूखा: जिंदा रहने के लिए आलू की रोटी खा रहे लोग, लगभग 33 लाख लोगों ने छोड़ा घर

बुंदेलखंड (5 मई): मंत्री कह रहे हैं कि बुंदेलखंड में पानी की कमी नहीं है, लेकिन असलियत ये है कि यहां लोग सूखे से त्राही-त्राही कर रहे हैं। जमीन बंजर हो चुकी है। 75 बीघा तक का किसान भूखों मरने के लिए मजबूर है। ऐसे में सोचिए गरीब का क्या हाल होगा? धीरे-धीरे लोग बुंदेलखंड छोड़ कर रोजी-रोटी की तलाश में देश के दूसरे हिस्सों के लिए गाड़ी पकड़ रहे हैं? 

बुंदेलखंड के हर हिस्से में ऐसी ही धूल उड़ रही है । पानी का दूर-दूर तक कोई निशान नहीं । जानवरों को भी चारे के लिए कुछ नहीं मिल रहा है। हमीरपुर के किसान अपने खेतों में सिर पकड़ कर बैठे हैं। उनकी समझ में नहीं आ रहा कि किसको कोसें- अपनी किस्मत को...सिस्टम को या फिर कुदरत को? 

ऐसा सूखा देखा नहीं कभी... जो सूखे के इस दर्द को नहीं झेल पाए, उन्होंने अपनी जिंदगी ही खत्म कर दी। हमीरपुर के पचखुरा के मल्लू सिंह 35 बीघा जोत के मालिक हैं लेकिन, इतना भी अनाज नहीं हुआ कि अपने परिवार भी दो वक्त की भूख मिटा सकें। पूरे इलाके में मल्लू सिंह जैसे एक-दो नहीं कई किसान हैं। 

धर्मेंद्र सिंह तो 75 बीघा जोत के मालिक है । एक जमाने से बाप-दादा की विरासत संभालते आ रहे धर्मेंद्र सिंह को समझ में नहीं आ रहा कि अब आगे की गाड़ी कैसे चलेगी? वे बताते हैं कि एक क्लिंटल पैदा हुआ है...जो सब मजदूर ले गए, हम क्या करेंगे।

पूरे इलाके में बच्चे भूखे तड़प रहे हैं- कोई साइकल के पूराने टायर को चलाकर भूख- प्यास भूलाने की कोशिश कर रहा है...तो कोई टकटकी लगाए सरकारी मदद का इंतजार कर रहा है। 

हालात, इतने बिगड़ गए हैं कि लोग अब बुंदेलखंड से भागने लगे हैं। 32 लाख 75 हजार 597 लोग अभी तक पलायन कर चुके हैं। > बांदा से 7 लाख 37 हजार 920   > चित्रकूट से 3 लाख 44 हजार 801 > महोबा से 2 लाख 97 हजार 547 > हमीरपुर से 4 लाख 17 हजार 489   > जालौन से 5 लाख 38 हजार 147  > झांसी से 5 लाख 58 हजार 377 > ललितपुर से 3 लाख 81 हजार 316 

लोग जिंदगी की आस में दूसरी जगह जा चुके हैं। जो बच गए हैं वो आलू की रोटियां खाने के लिए मजबूर हैं। ये लोग आलू को कूट कर उसकी रोटियां बनाते हैं। इसे शायद ही कोई खाना पसंद करेगा। लेकिन, यहां के लोगों के पास जिंदा रहने के लिए कोई दूसरा चारा नहीं है।

हमीरपुर में जैसे-जैसे लोग जिंदगी की गाड़ी खींच रहे हैं । इलाके में दूर-दूर तक पानी का कहीं कोई नामो-निशान नहीं है । लेकिन, प्रशासन की नजर में सूखा प्रभावित लोगों तक पूरी मदद पहुंच रही है ।

बुंदेलखंड इलाके के ज्यादातर हैंडपंप सूख चुके हैं और अब वो जानवर बांधने के काम आ रहे हैं। ऐसे में अगर किसी सूखे कुंए से ऐसा पानी भी निकल आए तो डोर और बाल्टी से खींचने की होड़ काम शुरू हो जाती है। पता नहीं ये भी मिले या ना मिले, इस उम्मीद के साथ कि जो है- वही जिंदगी बचाएगा ।