धनतेरस पर बाबा रामदेव ने लांच किया पतंजलि परिधान, संस्कारी जींस` से लेकर मिलेगा सबकुछ


न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (5 नवंबर): योग गुरुबाबा रामदेव ने धनतेरस के मौके पर 'पतंजलि परिधान' को लांच कर दिया है। इसके साथ ही बाबा रामदेव ने गारमेंट्स इंडस्ट्री में भी अपना कदम रख दिया। रामदेव ने आज दिल्ली के नेताजी सुभाष प्लेस में पहले 'पतंजलि परिधान' शोरूम का उद्घाटन किया गया। इस मौके पर योगगुरु ने कहा कि विदेशी कंपनियों को टक्कर देने के लिए धनतेरस को 'पतंजलि परिधान' की शुरुआत हो रही है जिसमें जींस से लेकर एथनिक वीयर और एक्सेसरीज तक मिला करेंगी। रामदेव ने कहा कि दिसंबर तक वह देश में करीब 25 नए स्टोर खोलेंगे।
इस मौके पर रामदेव के साथ मशहूर पहलवान सुशील कुमार, फिल्म प्रोड्यूसर मधुर भंडारकर भी मौजूद रहे। रामदेव ने साफ किया कि 'पतंजलि परिधान' शोरूम में 3 हजार नए प्रॉडक्ट मिलेंगे। इनमें भारतीय कपड़ों से लेकर वेस्टर्न कपड़े, एक्सेसरीज और गहनों की भी बिक्री होगी। साथ ही उन्होंने कहा कि दिवाली पर इस शोरूम में 25 फीसदी तक का डिस्काउंट भी मिलेगा।
'परिधान' शोरूम में लिव फिट स्पोर्ट्स वीयर, एथनिक वीयर, आस्था वीमेंस वीयर और संस्कार मेंस वीयर नाम से अलग-अलग कैटगरी में कपड़े बिकेंगे। मेंस वीयर में जींस भी बिकेंगी।

 कंपनी ने अपने निमंत्रण पत्र में लिखा है 'खादी से जिस प्रकार स्वतंत्रता संग्राम की शुरुआत हुई, उसी तरह 'पतंजलि परिधान' भी देश में आर्थिक आजादी की नई क्रांति शुरू करेगा क्योंकि वस्त्र सिर्फ पहनावे की चीज नहीं बल्कि हमारी पहचान, आत्म-सम्मान और आत्म-गौरव का परिचायक है, जिससे किसी कीमत पर समझौता नहीं होना चाहिए।' कंपनी का दावा है कि स्वदेशी जींस भारतीयों, खासकर महिलाओं के लिए बहुत ही आरामदेह होगी. 'परिधान' के तहत करीब 3000 प्रॉडक्ट लॉन्च होंगे. परिधान के अन्य उत्पादों में बेडशीट्स, योग वीयर, स्पोर्ट्सवीयर भी भारतीय संस्कृति से प्रेरित होंगे।
आपको बता दें कि पतंजलि कई क्षेत्र में अपने उत्पाद उतार चुकी है। पतंजलि के एमडी और कोफाउंडर बालकृष्ण के मुताबिक, अब 'परिधान' के तहत कंपनी मेट्रो और नॉन मेट्रो शहरों में करीब 100 स्टोर खोलेगी। नोएडा में परिधान के काम के लिए पहले ही अलग से एक टीम बना दी गई है।

आचार्य बालकृष्ण ने एक इंटरव्यू में कहा था कि जींस एक पश्चिमी अवधारणा है और इसके साथ हम दो ही चीजें कर सकते हैं. एक या तो हम उनका बॉयकॉट कर दें और दूसरा हम उन्हें अपनी परंपरा के हिसाब से ढाल लें. जींस हमारे समाज में इतनी लोकप्रिय हो चुकी है कि हम इसे भारतीय समाज से अलग नहीं कर सकते हैं. स्वदेशी जींस की स्टाइल, डिजाइन और फैब्रिक का भारतीयकरण किया जाएगा।


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