अब रामदेव करेंगे कैंसर का इलाज

अधीर यादव, देहरादून (2 मई): बाबा रामदेव अब आयुर्वेद के क्षेत्र में मिसाल कायम करने की तरफ बढ़ रहे हैं। इसके लिए हरिद्वार के पतंजलि योगपीठ में पतंजलि रिसर्च इंस्टीट्यूट का निर्माण किया गया है। इस रिसर्च इंस्टीट्यूट में कैंसर जैसी बीमारी तक की कारगर आयुर्वेदिक दवा बनाने की योजना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल इस रिसर्च सेंटर का उद्घाटन करेंगे।


योग के बाद अब बाबा रामदेव आयुर्वेद को भी पूरी दुनिया में गौरव दिलाने की कोशिशों में जुटे हुए हैं। इसके लिए हरिद्वार के पतंजलि योगपीठ में 200 करोड़ रुपये की लागत से पतंजलि रिसर्च इंस्टीट्यूट का निर्माण किया गया है। अत्याधुनिक सेवाओं से लैस ये दुनिया का पहला ऐसा सेंटर है जिसमें आयुर्वेद की दवाइयां बनाने के लिए अत्याधुनिक मशीनों से जड़ी-बूटियों पर रिसर्च का काम होगा। इसके जरिए ये पता लगाया जाएगा कि किस बीमारी में कौन सी जड़ी-बूटी कारगर साबित होगी।


इस रिसर्च सेन्टर की सबसे बड़ी खूबी ये है कि इसमें आयुर्वेदिक दवाओं के परीक्षण के लिए नैनो स्ट्रिंग नाम की अत्याधुनिक मशीन मंगाई गई है जो मॉली क्यूलर बायोलॉजी के लिए काम करेगी। इस मशीन से जड़ी-बूटियों पर रिसर्च कर कैंसर की कारगर दवाई खोजी जाएगी। अभी ये मशीन भारत की किसी लैब में मौजूद नहीं है।


पंतजलि आयुर्वेदिक रिसर्च सेंटर में आठ से ज्यादा रिसर्च लैब बनाई गई है। इनमें अलग-अलग बीमारियों के इलाज के लिए जड़ी-बूटियों पर रिसर्च कर खास आयुर्वेदिक दवाइयां बनाई जाएंगी। कैंसर को जड़ से खत्म करने के लिए यहां खास रिसर्च होगा।


पंतजलि रिसर्च सेन्टर में पंतजलि हर्बल रिसर्च डिपार्टमेंट अलग से खोला गया है। इसी के तहत वनस्पति विभाग की एक खास लैब भी बनाई गई है।रिसर्च सेंटर के परिसर में ही पंतजलि हर्बल गार्डन और चरक ऋषि गुफा का निर्माण भी किया गया है। इस चरक गुफा का मकसद आज की पीढ़ी को प्राचीन भारतीय योग और आयुर्वेद की जानकारी देना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 3 मई को इस पतंजलि रिसर्च इंस्टीट्यूट का उद्घाटन करेंगे। साथ ही वो पतंजलि हर्बल पार्क भी देश को सौंपेंगे।


दो साल की मेहनत के बाद पंतजलि आयुर्वेदिक रिसर्च सेंटर तैयार हुआ है। अब इसके जरिए कैंसर, शुगर और लीवर की जानलेवा बीमारियों से दुनिया को निजात दिलाने की कोशिश की जाएगी।