येदियुरप्पा का सरकारी क्लर्क से लेकर मुख्यमंत्री तक का सफर

नई दिल्ली ( 17 मई ): बीएस येदियुरप्पा ने राजभवन में गुरुवार को कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद का शपथ लिया। येदियुरप्पा ने ईश्वर और किसानों के नाम पर मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। लेकिन अब यह देखना होगा कि येदियुरप्पा फ्लोर टेस्ट में सफल होंगे या नहीं। 75 साल के येदियुरप्पा ने दक्षिण की राजनीति में एक बार फिर बीजेपी को मजबूती दी है।मुख्यमंत्री येदियुरप्पा कभी सरकारी क्लर्क हुआ करते थे। एक हार्डवेयर की दुकान के मालिक बीएस येदियुरप्पा आज तीसरी बार कर्नाटक के मुख्यमंत्री बने हैं। उनकी कहानी सफलता का शानदार उदाहरण है। येदियुरप्पा का पूरा नाम बूकानाकेरे सिद्धलिंगप्पा येदियुरप्पा है। वह महज 15 साल की उम्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) जुड़ गए थे।येदियुरप्पा ने जनसंघ से अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत की। वह अपने गृहनगर शिमोगा जिले के शिकारीपुरा में बीजेपी के अगुवा रहे। 1970 के दशक की शुरुआत में वह शिकारीपुरा तालुक से जनसंघ प्रमुख बने। वर्तमान में शिमोगा लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे येदियुरप्पा 1983 में इस सीट से पहली बार विधायक चुने गए थे। फिर इस सीट का उन्होंने पांच बार प्रतिनिधित्व किया।आपातकाल के समय जेल भी गए थे येदियुरप्पालिंगायत समुदाय के इस दिग्गज नेता को किसानों की आवाज उठाने के लिए जाना जाता है। अपने चुनावी भाषणों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इसका बार-बार जिक्र भी कर चुके हैं। येदियुरप्पा देश में आपातकाल के दौरान जेल भी गए। उन्होंने समाज कल्याण विभाग में क्लर्क की नौकरी करने के बाद अपने गृहनगर शिकारीपुरा में एक चावल मिल में भी इसी पद पर काम किया था। इसके बाद शिमोगा में उन्होंने हार्डवेयर की दुकान खोली।2004 में भी थी 2018 जैसी स्थितिदिलचस्प यह है कि साल 2004 में भी 2018 की तरह ही स्थिति सामने आई थी। तब राज्य में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी के सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरने के बाद भी येदियुरप्पा मुख्यमंत्री नहीं बन सके थे, लेकिन तब कांग्रेस और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा की जेडी (एस) के गठजोड़ की वजह से यह संभव नहीं हो सका था।तब राज्य की सरकार कांग्रेस के धरम सिंह के नेतृत्व में बनी थी। येदियुरप्पा ने कथित खनन घोटाला में लोकायुक्त द्वारा मुख्यमंत्री धरम सिंह पर अभियोग लगाए जाने के बाद वर्ष 2006 में एचडी देवगौड़ा के बेटे कुमारस्वामी के साथ हाथ मिलाया और धरम सिंह की सरकार गिरा दी।2008 में राज्य में पहली बार बनी बीजेपी की सरकारबारी-बारी से मुख्यमंत्री पद की व्यवस्था के तहत कुमारस्वामी मुख्यमंत्री बने और येदियुरप्पा उपमुख्यमंत्री बने। हालांकि 20 महीने बाद ही जेडी(एस) ने सत्ता साझा करने के समझौते को नकार कर दिया, जिसके चलते गठबंधन की यह सरकार भी गिर गई और येदियुरप्पा महज 7 दिन तक ही सीएम बन पाए थे। अब आगे के चुनावों का रास्ता साफ हुआ।2008 के चुनाव में येदियुरप्पा के नेतृत्व में पार्टी ने जीत हासिल की और दक्षिण में पहली बार उनके नेतृत्व में बीजेपी की सरकार बनी। बहरहाल, येदियुरप्पा बेंगलुरु में जमीन आवंटन को लेकर अपने बेटे के पक्ष में मुख्यमंत्री कार्यालय के कथित दुरुपयोग को लेकर विवादों में घिरे।अवैध खनन घोटाला मामले में लोकायुक्त ने उन पर अभियोग लगाया और 31 जुलाई 2011 को येदियुरप्पा को सीएम पद से इस्तीफा देना पड़ा। कथित जमीन घोटाला के संबंध में अपने खिलाफ वारंट जारी होने के बाद उसी साल 15 अक्टूबर को उन्होंने लोकायुक्त अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण किया। एक हफ्ते वह जेल में रहे।इस घटनाक्रम को लेकर बीजेपी से नाराज येदियुरप्पा ने पार्टी छोड़ दी और कर्नाटक जनता पक्ष का गठन किया। 2013 के चुनावों में उन्होंने छह सीटें और दस फीसदी वोट हासिल कर बीजेपी को सत्ता में आने से रोक दिया।2014 में बीजेपी में फिर आएवर्ष 2014 के लोकसभा चुनावों से पहले येदियुरप्पा की केजेपी का बीजेपी में विलय हो गया जिसके बाद 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने राज्य की 28 में 17 सीटों पर जीत दर्ज की।26 अक्टूबर 2016 को येदियुरप्पा को बड़ी राहत मिली। सीबीआई की विशेष अदालत ने उन्हें, उनके दोनों बेटों और दामाद को 40 करोड़ रुपये के अवैध खनन मामले में बरी कर दिया।कर्नाटक हाई कोर्ट ने घोटाले के आरोपों से किया बरीइसी मामले के चलते वर्ष 2011 में उन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। जनवरी 2016 में कर्नाटक उच्च न्यायालय ने, भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम के तहत लोकायुक्त पुलिस की ओर से येदियुरप्पा के खिलाफ दर्ज सभी 15 एफआईआर को रद कर दिया। उसी साल अप्रैल में येदियुरप्पा चौथी बार राज्य बीजेपी के प्रमुख नियुक्त हुए। बीजेपी ने उन्हें अपना मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया। आज उन्होंने इस पद के लिए शपथ भी ले ली।