...और नारायण मूर्ति को अजीम प्रेमजी ने विप्रो में नहीं दी थी नौकरी

नई दिल्ली (17 अगस्त) :  इंफोसिस के एन नारायण मूर्ति और विप्रो के अजीम प्रेमजी को कारोबारी जगत में कौन नहीं जानता? लेकिन क्या आप यकीन करेंगे कि कभी नारायण मूर्ति नौकरी मांगने के लिए अजीम प्रेमजी के पास गए थे और उन्हें नौकरी नहीं मिली थी।

इकोनॉमिक टाइम्स में एक लेख में खुद नारायण मूर्ति ने ये जानकारी दी। नारायण मूर्ति तब पटनी कंप्यूटर सिस्टम में काम करते थे। लेकिन, जब उन्होंने अपनी नौकरी बदलनी चाही तो विप्रो के एचआर हेड ने उनकी मुलाकात अजीम प्रेमजी से करवाई। प्रेमजी ने नारायण मूर्ति से बातचीत तो बहुत देर तक की, लेकिन नौकरी पर नहीं रखा और आगे जाकर नारायणमूर्ति ने इन्फोसिस की स्थापना कर डाली।

लेख में नारायण मूर्ति ने अजीम प्रेमजी की शख्सियत की भरपूर तारीफ करते हुए कहा है कि अगर उन्हें विप्रो में नौकरी मिल गई होती तो इन्फोसिस की स्थापना में कुछ साल की देर हो गई होती। लेख में नारायण मूर्ति बताते हैं, पटनी कंप्यूर में मेरे बॉस अशोक पटनी से मेरी खूब बनती थी। वह मेरे सबसे अच्छे बॉस थे। लेकिन, कुछ व्यक्तिगत कारणों से1979-80 में उन्होंने अपना कुछ वक्त पुणे में बिताने का फैसला किया। चूंकि मैं उन्हीं को रिपोर्ट किया करता था, इसलिए उन्हें अपने महत्वपूर्ण परफॉर्मेंस इंडिकेटर्स का अपडेट देने के लिए सप्ताह में एक बार मुझे पुणे जाना पड़ता था।'

वह आगे कहते हैं, 'हालांकि मैं अशोक के साथ अपने रिश्ते से 100 फीसदी खुश था। फिर भी इस स्थिति से थोड़ा परेशान था और खुद का कुछ करने से पहले नौकरी बदलना चाह रहा था। तभी विप्रो में एचआर हेड मेरे मित्र प्रसन्ना ने मुझे इस सॉफ्टवेयर ग्रुप (विप्रो) के मुखिया के रूप में जॉइन करने की पेशकश की और अजीम के साथ मीटिंग अरेंज करवा दी।'

नारायण मूर्ति ने लिखा, 'अजीम मुझे बातचीत के लिए मुंबई के विलिंगटन क्लब ले गए। वह बहुत ही मिलनसार और सुलझे व्यक्ति जान पड़े। संयोग से मैं उन्हें संतुष्ट नहीं कर पाया और मुझे नौकरी नहीं मिली। मैं अजीम के प्रति आभारी हूं कि उन्होंने मुझे खारिज कर दिया वरना इन्फोसिस की स्थापना में कुछ साल और लग जाते। पूरी बातचीत के दौरान मार्केट और कॉम्पिटिटर्स को समझने की अजीम की उत्सुकता से मैं बहुत प्रभावित हुआ।'

नारायणमूर्ति के मुताबिक, 'उनकी पत्नी सुधा और अजीम की पत्नी यास्मीन बहुत अच्छी सहेली हैं और दोनों साहित्यिक गतिविधियों में खूब भाग लेती हैं। नारायणमुर्ति कहते हैं, अजीम ने हमेशा कड़ी मेहनत और आत्मसंयम के दम पर आगे बढ़े हैं। वह देश में इकॉनमी क्लास में सफर करते हैं और फ्लाइट्स में उनसे मिलना और खूब बातचीत करना बहुत सुखदायी होता है।'