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मोदी से बोले देश के साधु-संत- 'पाकिस्तान को ठोक दो-राम मंदिर रोक दो'

पुलवाम हमले के पांचवे दिन भी देश भर के लोगों में बदले की आग धधक रही है। इन परिस्थितियों से सभी राजनीतिक दल भी गुजर रहे हैं। शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने राम जन्मभूमि रामाग्रह यात्रा और राम मंदिर शिलान्यास का कार्यक्रम स्थगित कर दिया है।

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (17 फरवरी): पुलवाम हमले के पांचवे दिन भी देश भर के लोगों में बदले की आग धधक रही है। इन परिस्थितियों से सभी राजनीतिक दल भी गुजर रहे हैं। शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने राम जन्मभूमि रामाग्रह यात्रा और राम मंदिर शिलान्यास का कार्यक्रम स्थगित कर दिया है।  उन्होंने कहा कि राम मंदिर का मुद्दा राष्ट्रीय हित के मुद्दे से ध्यान हटा सकता है, इस लिए फिल्हाल  स्थगित किया जा रहा है।  शंकराचार्य स्वरूपानंद जी के शिष्यों का कहना है इस महौल में प्रधानमंत्री मोदी से आग्रहै  है कि भले ही राम मंदिर रोक दो लेकिन पाकिस्तान को ठोक दो। कुंभ नगरी प्रयागराज में परम धर्म संसद में शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने आगामी 21 फरवरी को अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के शिलान्यास करने का ऐलान किया था। जिसके लिए तमाम साधू-संतों को रामाग्रह यात्रा के तहत अयोध्या पहुंचने का आह्वान किया गया था, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ और अखाड़ा परिषद ने शंकराचार्य से राष्ट्रहित में शिलान्यास और रामाग्रह यात्रा रद करने का आग्रह किया था, जिसे शंकराचार्य ने स्वीकार कर लिया।

इससे पहले शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे और बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के सर सुंदरलाल अस्पताल में भर्ती थे। इस दौरान उन्हें स्वास्थ्य ठीक न होने के चलते यात्रा स्थगित करने की सलाह भी दी जा रही थी, लेकिन वे राजी नहीं थे। लेकिन अस्पताल से काशी के श्रीविद्यामठ लौटे शंकराचार्य को जब पुलवामा में हुई आतंकी घटना और देश की परिस्थितियों से अवगत कराया गया और इस संबंध में अखाड़ा परिषद और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अनुरोध किया, तब उन्होंने कहा हम देश के साथ हैं।यात्रा के संबंध में शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद का प्रतिनिधित्व करने हुए उनके शिष्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि राम जन्मभूमि के संदर्भ में जो निर्णय लिया गया है वह सामयिक और आवश्यक है। लेकिन देश में उत्पन्न हुई इस आकस्मिक परिस्थिति में यह यात्रा कुछ समय तक के लिए स्थगित करने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने बताया कि रामाग्रह यात्रा और शिलान्यास कार्यक्रम इसलिए भी आवश्यक है क्योंकि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि अयोध्या में गैर-विवादित अधिग्रहित भूमि उनके मालिकों को दे दी जाए।लेकिन अदालत ने केंद्र की अर्जी को मूल वाद से जोड़ दिया है। सुप्रीम कोर्ट के इस कदम से उस भूमि के हिंदुओं के हाथ से निकल जाने का खतरा खड़ा हो गया है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा सरकार द्वारा भगवान राम की प्रतिमा स्थापित करने की जो योजना बनाई गई है वह भी शास्त्र सम्मत और सनातन धर्मियों की भावना के विपरीत है।

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