अयोध्या में मंदिर का मुद्दा गर्माया, वीएचपी के संतों की मांग- राम मंदिर पर अध्यादेश लाए सरकार

न्यूज 24 ब्यूरो, अमित कुमार, नई दिल्ली (5 अक्टूबर): राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद से जुड़ी विवादित जमीन के मालिकाना हक को लेकर मुकदमे की नियमित सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में 29 अक्टूबर से शुरू होने जा रही है। इससे पहले ही राम मंदिर के निर्माण को लेकर विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने कड़े तेवर अपना लिए हैं। शुक्रवार को दिल्ली में बीएपची से जुड़े संतों की हुई अहम बैठक हुई। संतों ने राम मंदिर के निर्माण पर केंद्र सरकार से अध्यादेश लाने के लिए दबाव बनाने का फैसला किया है।संतो की बैठक में स्वामी चिन्मयानंद ने पीएम मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि राम मंदिर के मसले पर मोदी चुप क्यों हैं? सूत्रों के मुताबिक संतो ने बैठक में कहा कि राम मंदिर का निर्माण जल्द जल्द शुरू हो उसके लिए या तो सरकार कानून बनाए या अध्यादेश लाए। अब फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को करना है।आचार्य महामंडलेश्वर विशोकानन्द ने कहा कि देश भर में लोग पूछते हैं कि क्या सोच कर आप लोगों ने मोदीजी को प्रधानमंत्री बनाया, मंदिर तो बना नहीं। उन्होंने कहा कि दिल्ली के रामलीला मैदान में सभा हो और उसमें मोदीजी को बुलाया जाए।महामंडलेश्वर डॉ रामेश्वरदास वैष्णव जी महाराज ने कहा कि कानून से पहले सरकार तीन तलाक की ही तरह राम मंदिर निर्माण के लिए भी अध्यादेश लाये, तो वहीं अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जीतेन्द्रानंद सरस्वती ने कहा कि कोर्ट से कभी फैसला नहीं हो सकेगा। एक मात्र विकल्प है कि कानून बनाकर ही मंदिर का निर्माण हो सकेगा। उन्होंने कहा कि भाजपा ही नहीं एनडीए के तीनसौ से अधिक सांसदों में से एक भी मुस्लिम सांसद नहीं है। सबको जनता ने नकार दिया। हिंदू भावनाओं की सरकार उपेक्षा न करे।बलभद्राचार्य जी महाराज ने कहा कि 6 दिसंबर 2018 तक राम मंदिर शुरू हो जाना था। उन्होंने कहा कि अब जनता में हम क्या मुंह दिखाएंगे? उन्होंने कहा कि कई कानूनों के लिए मोदीजी ने सुप्रीम कोर्ट को चैलेंज किया तो फिर राम मंदिर के लिए क्यों नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि संत मोदीजी से समय लें और उनसे मिलकर अपनी बात कहते हैं। इसके साथ ही संत अपनी मांगों को लेकर आज राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से भी मुलाकात करेंगे।