पूर्व आईपीएस ने राम मंदिर को लेकर किया यह बड़ा दावा

नई दिल्ली (20 जून): पूर्व आईपीएस अधिकारी किशोर कुणाल ने दावा किया है कि अयोध्या के राम मंदिर को 1528 में अवध के तत्कालीन गवर्नर मीर बाकी ने नहीं गिराया था बल्कि 1660 में औरंगजेब के गवर्नर फेदाई खान ने गिरवाया था। यानी राम मंदिर को बाबर के नहीं बल्कि औरंगजेब के कार्यकाल में ढहाया गया था।

माना जाता रहा है कि मीर बाकी ने 1528 में राम मंदिर को गिरा कर वहां पर बाबरी मस्जिद का निर्माण करवाया था। कुणाल ने यह दावा अपनी पुस्तक ' अयोध्या रीविजिटेड ' में किया है। पुस्तक की प्रस्तावना सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जीबी पटनायक ने लिखी है। प्रस्तावना में उन्होंने कहा है कि लेखक ने 'अयोध्या के इतिहास को नया आयाम दिया है और कई तथ्यों को स्थापित किया है जो आम धारणा और कई इतिहासकारों के मतों के विपरीत हैं।'

यह है आधार: पूर्व आईपीएस कुणाल ने अंग्रेजी राज की पुरानी फाइलों, संस्कृत की प्राचीन पुस्तकों, इंग्लिश, फ्रेंच विद्वानों और पुरातात्विक खुदाई की समीक्षा को आधार बनाते हुए यह दावा किया है। कुणाल ने विवादित स्थल के उत्कीर्णन को फर्जी बताया है और यह साबित करने की कोशिश की है कि इस आधार पर कई इतिहासकारों द्वारा दिया गया निष्कर्ष गलत है। उन्होंने भारत का दौरा करने वाले और यहां दो दशक से अधिक समय तक रहने वाले ऑस्ट्रेलियाई यात्री फादर जोसेफ टीफेंथालेर का भी उल्लेख किया है जिन्हें स्थानीय लोगों ने बताया था कि मंदिर को औरंगजेब ने तोड़ा था।

कुणाल ने यह भी साबित करने की कोशिश की है कि अयोध्या में विवादित स्थल पर मस्जिद निर्माण से पूर्व राम जन्मभूमि मंदिर था। वह लिखते हैं कि बाबर से लेकर शाहजहां तक सभी मुगल शासक काफी उदार थे और सभी धर्मों को संरक्षण प्रदान करते थे, लेकिन औरंगजेब के लम्बे शासन काल में देश में कट्टरता बढ़ी।

कौन हैं कुणाल गुजरात कैडर के 1972 बैच के आईपीएस कुणाल बिहार के रहने वाले हैं। 1990 में वह केंद्रीय गृह मंत्रालय में विशेष कार्याधिकारी थे और अयोध्या विवाद से आधिकारिक तौर पर जुड़े भी रहे।