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सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले की लगातार 40वें दिन सुनवाई, आज दलीलें पूरी होने की उम्मीद, फैसला किया जा सकता है सुरक्षित

सुप्रीम कोर्ट में आज अयोध्या मामले की लगातार 40वें दिन सुनवाई होगी। अगर सबकुछ ठीक रहा तो आज इस मुद्दे पर सभी पक्षों की दलीलें आज पूरी हो जाएगी। सुप्रीम कोर्ट में आज राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद विवाद की नियमित सुनवाई का आखिरी दिन है।

(Image Credit: Google) 

प्रभाकर मिश्रा, न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (16 अक्टूबर): सुप्रीम कोर्ट में आज अयोध्या मामले की लगातार 40वें दिन सुनवाई होगी। अगर सबकुछ ठीक रहा तो आज इस मुद्दे पर सभी पक्षों की दलीलें आज पूरी हो जाएगी। सुप्रीम कोर्ट में आज राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद विवाद की नियमित सुनवाई का आखिरी दिन है। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई पहले की साफ कर चुके हैं कि 16 अक्टूबर को मामले की सुनवाई का 40वां और आखिरी दिन होगा। जानकारी के मुताबिक आज एक घंटा मुस्लिम पक्षकार जवाब देंगे। जबकि चार अन्य पक्षकारों को 45-45 मिनट मिलेगा। मोल्डिंग ऑफ रिलीफ पर भी बुधवार को ही सुनवाई हो सकती है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच के रुख से इस बात की पूरी संभावना है कि दशकों पुराने इस मामले की सुनवाई बुधवार को पूरी हो सकती है और फैसला सुरक्षित रखा सकता है।

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में 39वें दिन अयोध्या भूमि विवाद की सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष की ओर से वरिष्ठ वकील के. परासरन सुन्नी वक्फ़ बोर्ड के दलीलों का जवाब देने उठे तो शुरुआत भावनात्मक दलीलों से हुई। परासरन ने कहा कि बाबर जैसे विदेशी आक्रमणकारी को हिंदुस्तान के गौरवशाली इतिहास को ख़त्म करने की इजाज़त नहीं दी जा सकती। अयोध्या में राममन्दिर को विध्वंस कर मस्जिद का निर्माण एक ऐतिहासिक ग़लती थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट को अब दुरुस्त करना चाहिए। परासरन ने कहा कि एक विदेशी आक्रमणकारी को ये हक़ नहीं दिया जा सकता है कि वो इस देश में आकर ख़ुद को बादशाह घोषित करे और कहे कि मेरी आज्ञा ही क़ानून है। हालांकि इतिहास में अनेक शक्तिशाली हिंदू राजा भी रहे है लेकिन किसी के विदेश में इस तरह आक्रमण करने का कोई उदाहरण नहीं मिलता।

परासरन ने दलील को आगे बढ़ाते हुए कहा कि हिन्दू श्रीराम के जन्मस्थान पर अपनी आस्था को लेकर सैकड़ो साल से संघर्ष कर रहे है। अकेले अयोध्या में ही 50-60 मस्जिद है, मुसलमान किसी और मस्जिद में भी इबादत कर सकते हैं पर हिन्दुओ के लिए यह जगह उनके आराध्य श्रीराम का जन्मस्थान है, हम ये जगह नहीं बदल सकते। इस पर मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने टोकते हुए पूछा कि क्या परासरन ये भी बताएंगे कि अयोध्या में कितने मन्दिर हैं! परासरन ने धवन की टिप्पणी पर एतराज जताया। कहा- उन्होंने हिंदुओ के लिए जन्मस्थान के महत्व को साबित करने के लिए ये दलील दी है। फिर  ऐसी कोई तुलना करने से पहले वहाँ हिंदू- मुस्लिम जनसंख्या के अनुपात को भी देखिए।

आज परासरन की दलीलों के दौरान पांच सदस्यीय बेंच के जज चीफ जस्टिस जस्टिस बोबड़े और जस्टिस चन्दचूड़ ने कई सवाल पूछे। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने मुस्कुराते हुए मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन से पूछा - डॉ धवन, क्या हम हिंदू पक्ष से पर्याप्त सवाल पूछ रहे हैं ! कल आपका आरोप था कि हिंदू पक्ष से सवाल नहीं किये गए। चीफ जस्टिस ने परासरन से पूछा कि क्या आप सुन्नी सेंट्रल वक्फ़ बोर्ड की इस दलील से सहमत हैं कि एक मस्जिद हमेशा मस्जिद ही रहती है! परासरन ने जवाब दिया कि 'मेरा कहना सिर्फ इतना भर है कि एक मंदिर हमेशा मन्दिर ही रहेगा।

 मैं उनकी दलील पर कोई टिप्पणी नहीं करुंगा क्योंकि मैं इस्लामिक मान्यताओं का जानकार नहीं हूं।' सुन्नी वक्फ़ बोर्ड की तरफ से राजीव धवन ने दलील दी थी कि मस्जिद हमेशा मस्जिद ही रहती है (नमाज़ नहीं पढ़ने से उसके स्टेटस में कोई अंतर नहीं आता)। परासरन ने दलील दी कि 1885 का फैजाबाद कोर्ट का जो फैसला महंथ रघुबरदास के मामले में आया था वह फैसला हिन्दुओं के खिलाफ नहीं है जैसा कि मुस्लिम पक्ष कह रहा है। उस फैसले में ये कहा गया था कि मस्जिद हिन्दुओं के धार्मिक जगह पर बनाई गयी है। उस फैसले में ये भी कहा गया था कि चूँकि मस्जिद सदियों पहले बनाई गयी है इसलिए कोर्ट वहां मंदिर बनाने की इजाजत नहीं दे सकता। पराशरन ने कहा कि खाली जमीन पर  मस्जिद बनाई गयी , ये साबित करने की जिम्मेदारी मुस्लिम पक्ष की है, हिन्दू पक्ष की नही।

निर्मोही अखाड़े की ओर से पैरवी कर रहे  वकील सुशील कुमार जैन की मां का निधन हो गया है। इसलिए सुशील जैन की दलील आज नहीं हुई। सुशील जैन सुन्नी वक्फ़ बोर्ड के दलीलों का कल जवाब देंगे।मुख्यन्यायाधीश ने कल की सुनवाई के लिए सभी पक्ष के लिए समय भी तय कर दिया है। रामलला विराजमान के वकील सीएस वैद्यनाथन को 45 मिनट का समय मिला है सुन्नी वक्फ़ बोर्ड की दलीलों का जवाब देने के लिए। मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन को एक घण्टे का समय मिला है हिन्दू पक्ष के जवाब का प्रतियुत्तर देने के लिए। इसके अलावा 45-45 मिनट के चार स्लॉट दोनों पक्ष को मिला है अपनी दलील देने के लिए। 

उसके बाद 'मोल्डिंग ऑफ रिलीफ़' पर बहस होगी।मोल्डिंग ऑफ रिलीफ़ का मतलब है कोर्ट में पक्षकारों द्वारा जो मांग की गई होती है, कोर्ट उस मांग से अलग कुछ सुझाव देता है। मतलब अगर किसी पक्ष का दावा पूरी जमीन पर है तो कोर्ट पूछ सकता है कि क्या जमीन के किसी हिस्से पर समझौता हो सकता है? मोल्डिंग ऑफ रिलीफ़ पर बहस पूरी होने के बाद फैसला कोर्ट फैसला सुरक्षित करेगा। कोर्ट ने सुनवाई पूरी होने की आख़री 17 अक्टूबर तय की है। 

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