राम मंदिर मुद्दा: जानिए कब से शुरू हुआ विवाद, क्या है पूरा मामला

नई दिल्ली ( 21 मार्च ): सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर-बाबरी मस्जिद मामले पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि राम मंदिर मुद्दे को दोनों पक्ष आपस में मिलकर सुलझाएं। साथ ही कोर्ट ने कहा कि अगर जरूरत पड़ती है तो सुप्रीम के जज मध्यस्थता को तैयार हैं। देश की सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि राम मंदिर का मामला धर्म और आस्था से जुड़ा है।


 हम आपको बताते हैं कि क्या है राम मंदिर मामला और इस पर क्यों हैं विवाद।


-दावा किया जाता है कि अयोध्या में बाबरी मस्जिद का 1528 में निर्माण हुआ था। कहा जाता है कि बाबर ने अयोध्या में एक मस्जिद का निर्माण कराया जिसे बाबरी मस्जिद के नाम से लोग पुकारते हैं। हिंदू धर्म के लोगों का मानना है कि जहां पर बाबर ने मस्जिद बनवाई थी वहां पर भगवान राम का जन्म हुआ था।


-1853 में हिंदू धर्म के मानने वालों का आरोप लगाया कि भगवान राम के मंदिर को तोड़कर उसी स्थान पर मस्जिद का निर्माण काराया गया। कहा जाता है कि मुगलों के बाद अंग्रेजों के शासनकाल में इस मुद्दे को लेकर दोनों समुदायो में 1853 में हिंसा हुई जिसमें कई लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था।


-1859 में दंगों का असर को देखते हुए ब्रिटिश सरकार ने इस मामले का संज्ञान लिया और 1859 में अपनी ओर से तारों की एक बाड़ खड़ी करके विवादित भूमि के आंतरिक और बाहरी परिसर में मुस्लिमों और हिदुओं को अलग-अलग प्रार्थनाओं की इजाजत दी।


-ब्रिटिश शासन के दौरान सन 1885 में यह मामला पहली बार अदालत पहुंचा। महंत रघुबर दास ने फैजाबाद अदालत में बाबरी मस्जिद से लगे एक राम मंदिर के निर्माण की इजाजत के लिए अपील दायर की। अपील की सुनवाई चलती रही और टलती रही।


-1949 में बाबरी मस्जिद में गुप्त रूप से भगवान राम की मूर्ति रख दी गई। दावा किया गया कि भगवान राम का यही जन्म हुआ था। इसके बाद ये दावे सामने आए कि मंदिर हटाकर बाबरी मस्जिद बनवाई गई थी।


-1984 में राम मंदिर निर्माण के लिए एक कमेटी का गठित की गई।


-1986: इस विवादित स्थल को श्रद्धालुओं के लिए खोला गया. इसी साल 1986 में ही बाबरी मस्जिद कमेटी का गठन किया गया।


-1990 में भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने देशव्यापी रथयात्रा की शुरुआत की। साल 1991 में रथयात्रा का फायदा बीजेपी को हुआ और वो यूपी की सत्ता में आ गई। मंदिर बनाने के लिए देशभर से ईंटें भेजी गईं।


-6 दिसंबर 1992 के दिन हजारों की संख्या में सेवकों ने अयोध्या पहुंचकर बाबरी मस्जिद ढहा दिया, जिसके बाद सांप्रदायिक दंगे हुए।


-1992 में न्यायूमूर्ति लिब्रहान की अध्यक्षता में एक जांच आयोग का गठन किया गया। 1993 में इस आयोग ने जांच शुरू की।


-2002 में विवादित स्थल पर सैकड़ों श्रद्धालुओं का जमावड़ा शुरू हुआ। हाईकोर्ट के एएसआई को इस बात की जांच करने के लिए कहा गया कि 1528 में पहले वहां मस्जिद थी या नहीं।


-2003 में एएसआई ने कहा कि विवादित स्थल पर मंदिर अवशेष के सबूत हैं।


-2009 में लिब्रहान आयोग ने अपनी रिपोर्ट सौंपी।


-2010 में हाईकोर्ट ने इन विवादित स्थल को तीन हिस्सों में बांटने का फैसला सुनाया।


-2011 में सुप्रीम कोर्ट नें हाईकोर्ट के फैसले पर स्टे लगा दिया।