ब्लैक लिस्ट से बचने के लिए भारत को भारी जुर्माना देगी रोल्ज़ रॉयस

नई दिल्ली (25 जनवरी): रक्षा सामान बनाने वाली ब्रिटिश कंपनी रोल्ज रॉयस शायद भारत सरकार को भारी जुर्माना देने का मन बना रही है ताकि वह यहां ब्लैकलिस्ट होने से बच जाए। यूके में हुई जांच में साफ हो गया कि कंपनी ने विदेश में भ्रष्टाचार के मामले निपटाने के लिए 808 मिलियन डॉलर दिए। सरकारी अधिकारियों ने बताया कि नई नीति में रोल्ज रॉयस केस पर ध्यान रहेगा। नई नीति में 'प्री-कॉन्ट्रैक्ट इंटेग्रिटी पैक्ट' पर दस्तखत नहीं होने के स्थिति में जुर्माने का प्रस्ताव है, भले ही मामला पहले का ही क्यों नहीं हो। गौरतलब है कि यूके कोर्ट ने भारत के साथ दो रक्षा समझौतों पर रोक लगा दी है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मार्च 2004 में हॉक ट्रेनर जेट्स के लिए और 2007 में नेवी के सी हैरियर फाइटर जेट्स के इंजन के लिए हुई डील्स यूके अथॉरिटीज की नजर में हैं जिसने दुनियाभर में अनैतिक कार्य में संलिपत्ता के लिए कंपनी पर भारी जुर्माना लगाया है। सूत्रों ने ईटी को बताया कि रोल्ज रॉयस साल 2015 के आखिर में भारत सरकार को यूके में चल रही जांच की जानकारी दी थी। कंपनी ने बताया था कि यूके अथॉरिटीज ने संदिग्ध बिचौलियों से लिंक्स खंगालने में सहयोग करने को कहा है, लेकिन कंपनी को भारत सरकार की ओर से अभियोजन से छूट का कोई आश्वासन नहीं मिला। सीबीआई भारत में रोल्ज रॉयस के दो कारोबारी समझौतों की जांच कर रही है। ऐसे में यूके की सीरियस फ्रॉड ऑफिस की जांच में मिले सबूत से सीबीआई जांच को बल मिल गया है।

पहले ऐसे आरोपों में कंपनी को सीधे ब्लैकलिस्ट कर दिए जाने का प्रावधान था, लेकिन मनोहर पर्रिकर के अधीन रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी नई गाइडलांस में ज्यादा व्यावाहिरक नजरिया अपनाते हुए जरूरी कार्यों को जारी रखने की छूट दी गई। साथ ही, यह भी कहा गया कि सरकार चाहे तो जुर्माना लगाकर मामले को रफा-दफा कर सकती है। नई नीति के क्लाउज सी 1(बी) में स्पष्ट कहा गया है कि बोली लगाने के किसी भी चरण में गलत साधनों का इस्तेमाल पकड़े जाने पर इंटेग्रिटी पैक्ट पर दस्तखत हो जाने के बावजूद जुर्माना लगाया जा सकता है।