अगस्त में 41% घटी कारों की सेल्स, ऑटो सेक्टर मंदी की जाल में

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मनीष कुमार, न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली(9 सितंबर): ऑटो सेक्टर के लिये बुरी खबरों का दौर खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। हालत ये है कि ऑटोमोबाइल सेक्टर की संस्था सियाम ने जब से गाड़ियों के उत्पादन और सेल्स के आंकड़े जारी करने का रिवाज शुरु किया तबसे लेकर आज तक अगस्त महीने में गाड़ियों का उत्पादन और सेल्स सबसे निचले स्तर पर जा पहुंचा है। सेल्स में गिरावट के चलते ऑटोमोबाइल कंपनियां को प्रोडक्शन में कटौती करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटो मनुफैक्चरर्स (SIAM) द्वारा अगस्त महीने के लिये प्रोडक्शन और सेल्स के जारी किये गये आंकड़ों के मुताबिक गाड़ियों का उत्पादन और सेल्स 1997-98 के बाद सबसे निचले स्तरों पर जा पहुंचा है। वहीं अगस्त महीने में पैंसेंजर व्हीकल सेंगमेंट में पैसंजर कारों की बिक्री में 41.09 फीसदी की गिरावट आई है।   

संकट में ऑटोमोबाइल सेक्टर

 सोसाइटी ऑफ ऑटो मनुफैक्चरर्स यानी सियाम द्वारा जारी किये आंकड़ों के मुताबिक अगस्त 2019 महीने में पैसेंजर व्हीकल के प्रोडक्शन में 24.42 % की गिरावट आई है। अगस्त 2019 में कुल 2,77,432 पैसेंजर व्हीकल का प्रोडक्शन हुआ था, जबकि अगस्त 2018 में 3,67,094 पैसेंजर व्हीकल का उत्पादन हुआ था। अगस्त महीने में पैसेंजर व्हीकल की सेल्स में 31.57 % की गिरावट आई है। अगस्त 2019 में कुल 1,96,524 पैसेंजर गाड़ियों की बिक्री हुई है जबकि 2018 जुलाई में 2,87,198 गाड़ियों की बिक्री हुई थी।  टूव्हीलर का प्रोडक्शन जहाँ 17.08% अगस्त में घटा है वहीं सेल्स में भी 22.24% की गिरावट आई है। 

अप्रैल से अगस्त 2019 तक में गाड़ियों के उत्पादन में 12.25 % की गिरावट आई है। ऑटो कंपनियों ने कुल 1,20,20,944 गाड़ियों का उत्पादन किया जबकि अप्रैल से अगस्त 2018  के बीच कुल 1,36,99,848 गाड़ियों का उत्पादन हुआ था।  अप्रैल से अगस्त 2019 तक में गाड़ियों के सेल्स में 15.89 % की गिरावट आई है।  जिसमें से पैसेंजर कारों की सेल्स में 23.54 % और टू व्हीलर के सेल्स में 14.85 की कमी आयी है। दिसंबर 2016 के बाद दोपहिया वाहनों की बिक्री में सबसे बड़ी गिरावट देखी गई है। दिसंबर 2016 में दोपहिया वाहनों की बिक्री में 22.04 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी।

 बीते हफ्ते सियाम के सलाना कंवेनशन में सियाम के प्रेसीडेंट राजन वढ़ेरा ने ऑटो सेक्टर को सकंट से उबारने के लिये बीएस-6 गाड़ियों पर जीएसटी घटाने की मांग की थी जिससे गाड़ियों के दाम कम हो सके। इससे गाड़ियों के दाम कम होंगे जिससे मांग बढ़ाने में मदद मिलेगी और ऑटो सेक्टर पर कुछ हदतक सकंट को कम करने में मदद मिलेगा। इसी कार्यक्रम में सड़क परिवहन मंत्री ने भी माना कि ऑटो सेक्टर सकंट से जुझ रहा है, उन्होंने भरोसा दिया था कि बीएस-6 गाड़ियों पर जीएसटी को कम करने की ऑटो कंपनियों की मांग से वित्त मंत्री को अवगत करायेंगे।     

रोजगार पर असर

 ऑटो सेक्टर में इस स्लोडाउन का असर रोजगार पर पड़ा है। गाड़ियों के 300 शोरूम बन्द हो चुके हैं। जिससे 2.8 लाख लोग बेरोजगार हो चुके हैं। ऑटोमाबइल कंपनियों को ऑटो पार्ट्स सप्लाई करने वाली कंपनियों ने कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर रहे करीब 15,000 लोगों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। 10 लाख लोगों की नौकरी पर खतरा मंडरा रहा है। पूरा ऑटो सेक्टर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर 37 मिलियन( 3.70 करोड़) लोगों को रोजगार देता है। 23 अगस्त, 2019 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऑटो सेक्टर के लिये राहत पैकेज का ऐलान किया था साथ ही जल्द ही स्क्रैपेज पॉलिसी लाने का भरोसा दिया था। लेकिन वित्त मंत्री का राहत पैकेज ऑटोमोबाइल कंपनियों को कितना राहत दिला पाता है ये तो आने वाला समय ही बतायेगा।