हिटलर के घर को तोड़ेगी ऑस्ट्रिया सरकार

नई दिल्ली(18 अक्टूबर): ऑस्ट्रिया के ब्रूनो शहर स्थित जिस घर में हिटलर का जन्म हुआ था, उसे तोड़ने का फैसला किया गया है। इस जगह को नवीन नाजीवाद का तीर्थ बनाने से रोकने के लिए ऐसा किया जाना तय हुआ है।

- अधिकारियों ने सोमवार को इसकी घोषणा की। कई सालों से इसे लेकर कानूनी लड़ाई चल रही थी। ऑस्ट्रिया के एक अखबार को बताते हुए देश के आंतरिक मामलों के मंत्री ने बताया, 'हिटलर के घर को तोड़ दिया जाएगा। इस इमारत की नींव बची रहेगी, लेकिन इसके ऊपर एक नई इमारत बनाई जाएगी। इस इमारत का इस्तेमाल या तो समाजसेवा के लिए या फिर स्थानीय प्रशासन द्वारा किया जाएगा।'  

-उन्होंने बताया कि एक विशेषज्ञ समिति की सिफारिश के बाद यह फैसला लिया गया है। इस विवादित इमारत के साथ क्या किया जाए, यही तय करने के लिए इस समिति का गठन किया गया था। यह इमारत काफी बड़ी है। पीले रंग का यह घर 2011 से खाली पड़ा है। तब से ही इमारत के मालिक के साथ सरकार की कानूनी लड़ाई चल रही थी। पिछली एक सदी से भी ज्यादा समय से पोमर परिवार इस घर का मालिक रहा है। 20 अप्रैल 1889 को इसी घर में हिटलर का जन्म हुआ था। -1970 के शुरुआती सालों में ऑस्ट्रिया की सरकार ने पोमर के साथ एक लीज पर दस्तखत कर इस इमारत को विकलांग केंद्र में तब्दील कर दिया था। फिर 2011 में दोनों पक्षों के बीच हुआ समझौता उस वक्त टूट गया जब पॉमर ने यहां मरम्मत करवाए जाने की इजाजत देने से इनकार कर दिया। काफी पुरानी होने के कारण इस इमारत को मरम्मत की सख्त जरूरत थी। उसके बाद यह घर खरीदने के लिए ऑस्ट्रिया के आंतरिक मामलों के मंत्रालय ने पोमर को प्रस्ताव भी दिया, लेकिन उन्होंने घर बेचने से इनकार कर दिया। इसी साल जुलाई में सरकार ने इस घर को पोमर के कब्जे से लेने की अनुमति दे दी।

-मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि इसके लिए कानून में जो संशोधन किया गया, वह अभी पूरा नहीं हुआ है। इमारत गिराए जाने के फैसले पर संसद की मुहर लगनी बाकी है। प्रवक्ता ने कहा, 'लेकिन इस इमारत के साथ भविष्य में क्या करना है, इस बारे में हमने फैसला ले लिया है। इमारत अब ऑस्ट्रिया रिपब्लिक की संपत्ति है।' इस मसले को लेकर ब्रूनो शहर के अंदर भी काफी तल्ख बहस शुरू हो गई थी। इस शहर की आबादी 17,000 है। कुछ का कहना था कि इस इमारत को रिफ्यूजी केंद्र बना देना चाहिए, वहीं बाकियों का मत था कि नाजी शासन से ऑस्ट्रिया के मुक्त होने की याद में इसे एक संग्रहालय का रूप दिया जाना चाहिए।