यहां सेना के टीनएज रिक्रूट्स को एक दूसरे से रेप के लिए किया जाता था मजबूर!

नई दिल्ली (21 जून) :  चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज को लेकर ऑस्ट्रेलिया से बड़ी चौंका देने वाली ख़बर सामने आई है। एक रॉयल कमीशन को मंगलवार को बताया गया कि ऑस्ट्रेलियाई सेना में टीनएज रिक्रूट्स को जघन्य शुरुआती ट्रेनिंग के दौरान एक दूसरे के साथ रेप करने तक के लिए मजबूर किया जाता था। इस आशय की रिपोर्ट 'द सिडनी मॉर्नंग हेराल्ड'  में सोमवार को प्रकाशित हुई है।  

बता दें कि 'रॉयल कमीशन इनटू इंस्टीट्यूशनल रिस्पॉन्सेज़ टू चाइल्ड सेक्स एब्यूज़' पहले चर्च, स्पोर्ट्स बॉडीज़ और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्रीज़ की जांच कर चुका है।अब उसका फोकस ऑस्ट्रेलियाई डिफेंस फोर्स पर है।

कमीशन खास तौर पर 1960 और 1980 के बीच सक्रिय रहे दो ट्रेनिंग संस्थानों से जुड़ी शिकायतों पर ध्यान दे रहा है। इन संस्थानों के नाम थे- HMAS लीयूविन (पश्चिम ऑस्ट्रेलिया) और आर्मी एप्रेंटिस स्कूल बालकोम्बे (विक्टोरिया)।

जांच में सहायता दे रहे वकील एंगुस स्टीवार्ट ने बताया कि कमीशन से चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज़ को लेकर 111 लोगों ने संपर्क किया। इन सरवाइवर्स ने कमीशन को ऐसे सबूत दिए जिनसे पता चलता है कि उनका लीयूविन में ट्रेनिंग के पहले 6 महीने में सेक्सुअल एब्यूज़ हुआ। उस समय उनकी उम्र मात्र 15-16 साल की थी।

बताया गया कि सीनियर रिक्रूट्स की ओर से जूनियर रिक्रूट्स के साथ जो बुलिंग की जाती थी उसे 'ब्लैकबालिंग' या 'नगेटिंग'  का नाम दिया जाता था। इसमें जूनियर रिक्रूट्स को लिटा कर उनके प्राइवेट पार्ट्स पर बूट पॉलिश या टूथपेस्ट को सख्त ब्रश से फैला दिया जाता था। इसके अलावा 'रॉयल फ्लश' के नाम से जूनियर रिक्रूट के सिर को टॉयलेट में डाल दिया जाता था।  

एक सर्वाइवर सीजेए के मुताबिक उसे लीयूविन में पहले छह महीने की ट्रेनिंग में दूसरे जूनियर रिक्रूट्स के साथ ओरल और अप्राकृतिक सेक्स के लिए मजबूर किया गया। सीजेए के अनुसार 1967 में वे 16 साल के थे। लेकिन उनकी शिकायतों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया था बल्कि उन्हें ही 'ट्रबलमेकर' कहकर खारिज कर दिया गया था।