'विज्ञापनों में PM की फोटो हो सकती है, तो CM की क्यों नहीं?'

नई दिल्ली (9 मार्च): सरकारी विज्ञापन के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ कई राज्यों सरकार, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और दूसरे राज्यों की पुनर्विचार याचिका की है। जिसपर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है। 

गौरतलब है, सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा था कि सरकारी विज्ञापनों में सिर्फ राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या मुख्य न्यायाधीश की ही तस्वीर हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की उस दलील को ठुकरा दिया, जिसमें केंद्र सरकार ने कहा था कि यह नीतिगत मामला है। साथ ही इसमें न्यायपालिका को दखल नहीं देना चाहिए।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में केंद्र सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने दलील दी है। उन्होंने कहा है कि अगर प्रधानमंत्री की फोटो विज्ञापनों में हो सकती है तो मुख्यमंत्री और बाकी मंत्रियो की क्यों नहीं? मंत्री बिना चेहरे के हो गए हैं। पांच साल एक ही चेहरा देखने को मिलेगा, जो प्रधानमंत्री का है। दूसरे चेहरे भी दिखाना लोकतंत्र का हिस्सा है। पीएम और सीएम संघीय ढांचे का हिस्सा हैं, इसलिए यह भेदभाव नहीं हो सकता।

रोहतगी ने कहा, सरकारी विज्ञापन लोगों तक योजनाएं पहुंचाने का बड़ा जरिया हैं। आज का दौर विजुअल मीडिया का है, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया का है। विजुअल का लोगों पर बड़ा प्रभाव है। ऐसे में रोक लगाना ठीक नहीं है। संविधान के दिए अधिकारों के तहत लोगों को सरकारी कामकाज और योजनाओं की जानकारी लेने का अधिकार है।