स्वदेशी 'अस्त्र' मिसाइल का सफल परीक्षण, जल्द हो सकता है एयरफोर्स में शामिल

नई दिल्ली ( 16 सितंबर ): स्वदेशी मिसाइल अस्त्र को जल्द ही एयर फोर्स में शामिल किया जा सकता है। इसका फाइनल डिवेलपमेंट ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। देश में विकसित दृश्य सीमा से परे हवा से हवा में मार करने वाली अस्त्र मिसाइल ने बंगाल की खाड़ी के ऊपर चार दिन तक चले श्रृंखलाबद्ध सफल परीक्षणों के साथ ही अपना विकास चरण पूरा कर लिया है।

रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को एक बयान में कहा, ‘‘ओडिशा में चांदीपुर अपतटीय क्षेत्र में बंगाल की खाड़ी के ऊपर 11 से 14 सितंबर तक अस्त्र बी.वी.आर.ए.ए.एम के अंतिम विकास उड़ान परीक्षण सफलतापूर्वक आयोजित किए गए। लक्ष्य के रूप में पायलट रहित विमान को निशाना बनाते हुए सफलतापूर्वक कुल सात परीक्षण किए गए।’’ दृश्य सीमा से परे हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल (बी.वी.आर.ए.ए.एम) के सफल परीक्षण ने इसे भारतीय वायुसेना में शामिल किए जाने का मार्ग प्रशस्त कर दिया है।

यह मिसाइल प्रणाली भारतीय वायुसेना के सहयोग से रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित की गई है। हथियार प्रणाली को विकसित करने में रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के कई उपक्रमों और 50 से अधिक सार्वजनिक एवं निजी उद्यमों ने योगदान दिया है। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने मिसाइल के सफल परीक्षणों पर डीआरडीओ, वायुसेना, रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और उद्यमों को बधाई दी। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि सफल परीक्षणों के साथ हथियार प्रणाली का विकास चरण ‘‘सफलतापूर्वक’’ पूरा हो गया।

डीआरडीओ की मिसाइल एवं रणनीतिक प्रणालियों के महानिदेशक जी सतीश रेड्डी ने कहा कि कार्यक्रम के तहत विकसित प्रौद्योगिकियां हवा से हवा में और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों के अधिक संस्करणों के विकास के लिए महत्वपूर्ण साबित होंगी। मंत्रालय ने कहा कि उड़ान परीक्षणों में ‘‘अत्यधिक लंबी’’ दूरी और मध्यम दूरी पर कई लक्ष्यों को निशाना बनाने के परीक्षण भी शामिल थे। इसने कहा कि सभी उप् प्रणालियों ने बेहद सटीक प्रदर्शन किया और मिशन के सभी मानकों को पूरा किया। 

युद्धग्रस्त इलाके में भारतीय सेना किसी बारूदी सुरंग का शिकार होने से बच सके, इसके लिए रक्षा संगठन डीआरडीओ ने स्वदेशी ट्रॉल सिस्टम बनाया है। यह सिस्टम बारूदी सुरंगों को भेदकर सेना के वाहनों के लिए सुरक्षित लेन तैयार करता है। डीआरडीओ के बनाए इस सिस्टम के नीचे कई बार ब्लास्ट के जरिये हाल में टेस्ट किया गया, जिसमें सिस्टम खुद को बचाने में कामयाब रहा। जल्द ही यह सिस्टम सेना को ट्रायल के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।