राजस्थान-एमपी-छत्तीसगढ़ में सीएम पर सस्पेंस, राहुल गांधी ने कार्यकर्ताओं से फोन पर मांगी राय


न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (13 दिसंबर): मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में मुख्यमंत्री के नाम पर अब भी सस्पेंस बरकरार है। कांग्रेस ने चुनाव तो जीत लिया है लेकिन सीएम के चेहरे पर मंथन जारी है। इस सबके बीच कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कार्यकर्ताओं की राय जानने के लिए एक नया तरीका अपनाया है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं के पास राहुल गांधी का एक ऑडियो मैसेज पहुंच रहा है। जिसमें उनकी राय मांगी जा रही है। राहुल गांधी के इस ऑडियो मैसेज में 2 खास बातें हैं। एक तो ये कि राहुल गांधी सीएम का चुनाव लोकतांत्रिक तरीके से करने की कोशिश कर रहे हैं और दूसरी ये कि गुप्त मतदान की तर्ज पर सीएम का चुनाव किया जा रहा है।

राहुल गांधी हर हाल में पार्टी को एकजुट रखने की कवायद में जुटे हैं और वो इस काम में काफी हद तक कामयाब भी हुए हैं। कांग्रेस ने मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में गुटबाज़ी को खत्म करते हुए चुनाव लड़ा है, लेकिन चुनाव जीतने के बाद सीएम को लेकर माथापच्ची शुरू हो गई है। मध्य प्रदेश में वरिष्ठ कांग्रेस नेता कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच सीधा मुकाबला है। हालांकि सूत्रों की माने तो कमलनाथ का सीएम बनना लगभग तय है। आज भोपाल में विधायक दल की फिर से बैठक है। बताया जा रहा है कि पर्यवेक्षकों को एक-एक विधायक से मिलकर सबकी राय जानने के लिए कहा गया है। जिसके बाद आलाकमान को रिपोर्ट सौंपी जाएगी। माना जा रहा है कि आज रात तक राहुल गांधी सीएम का एलान कर देंगे
वहीं राजस्थान में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट में से किसी एक की ताजपोशी होनी है।दोनों ही नेताओं के समर्थक नतीजे आने के बाद से पूरा ज़ोर लगा रहे हैं।

वहीं अगर छत्तीसगढ़ की बात करें  तो यहां सीएम की रेस में चार नाम शामिल हैं। माना जा रहा है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल रेस में सबसे आगे चल रहे हैं। वहीं वरिष्ठ कांग्रेस नेता टीएस सिंह देव भी मुख्यमंत्री की रेस में शामिल हैं। पिछली विधानसभा में टीएस सिंह देव विपक्ष के नेता थे। पूर्व कैबिनेट मंत्री चरणदास महंत और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के एकमात्र सांसद ताम्रध्वज साहू के नाम भी चर्चा में शामिल हैं।

राहुल गांधी कार्यकर्ताओं के दिल की बात जानने जानने की हर कोशिश कर रहे हैं। चाहें राहुल का ऑडियो मैसेज हो या पर्यवेक्षकों का एक-एक विधायक की राय लेना। कांग्रेस आलाकमान किसी भी कीमत में 2019 से पहले पार्टी संगठन में फूट नहीं पड़ने देना चाहता और इसलिए भोलाल, रायपपुर और जयपुर से लेकर दिल्ली तक पार्टी मैराथन मंथन में जुटी हुई है।