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यूपी: बागपत में मिले महाभारत कालीन अवशेष

एएसआई के अधिकारियों ने बताया कि हम बागपत के सादिकपुर सनौली गांव में खुदाई कर रहे हैं। इस इलाके में इतनी प्राचीनतम सभ्यता मिलना हैरान करने वाला है। इसमें भी सबसे बड़ी बात तो यह कि इस इलाके में खुदाई में शाही कब्रों का एक समूह मिला है। इसलिए इस सभ्यता के अवशेष को महाभारत काल से जोड़कर भी देखा जा रहा है।

नई दिल्ली ( 5 जून ): उत्तर प्रदेश के बागपत में जमीन से दस सेंटीमीटर पहले कांस्य युगीन ऐसी सभ्यता के अवशेष मिले हैं, जो तकनीकी लिहाज से काफी उन्नत थी, बल्कि मेसोपोटामियन सभ्यता जैसी समृद्ध भी रही होगी। इस उन्नत सभ्यता के अवशेष बागपत के सादिकपुर सनौली गांव में आर्कियॉलजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) द्वारा चल रही एक पुरातात्विक खुदाई में सामने आए हैं।एएसआई के अधिकारियों ने बताया कि हम बागपत के सादिकपुर सनौली गांव में खुदाई कर रहे हैं। इस इलाके में इतनी प्राचीनतम सभ्यता मिलना हैरान करने वाला है। इसमें भी सबसे बड़ी बात तो यह कि इस इलाके में खुदाई में शाही कब्रों का एक समूह मिला है। इसलिए इस सभ्यता के अवशेष को महाभारत काल से जोड़कर भी देखा जा रहा है।इस खुदाई में शाही कब्रों का एक समूह मिला है, जिसमें कांस्य युग की सभ्याता और संस्कृति की ओर इशारा करती तमाम वस्तुएं मिली हैं। इस खुदाई का काम देख रहे एएसआई अधिकारी डॉ एसके मंजुल ने कहा, 'अभी तक हमारे सामने जो भी आया है, उससे लगता है कि यह काल 4000 साल पुराना रहा होगा। लगभग 1800 से 2000 ईसा पूर्व का।खुदाई के दौरान में एएसआई को एक खेत के 50 मीटर के दायरे के भीतर आठ कब्रें मिली हैं, जिनमें से तीन कब्रें अलग-अलग हैं। वहीं, तीन सेकेंडरी कब्रें और दो प्रतीकात्मक कब्रें है। इसी के साथ एक कुत्ते और एक चिड़िया की कब्र भी मिली हैं। सेकेंडरी कब्रें वो होती हैं, जिसमें कहीं और दफन हुए शरीर के अवशेष लाकर एक जगह रख दिए जाते हैं। जबकि प्रतीकात्मक में व्यक्ति को दफन न कर उससे जुड़ी व्यक्तियों को दफन किया जाता है, जिनके बारे में माना जाता है कि मरने के बाद उनके शरीर मिला ही नहीं।एएसआई के मुताबिक, कब्रें और अंतिम संस्कार के साक्ष्य तो पहले भी मिले हैं, लेकिन पहली बार ताबूत में रखी इतनी पुरानी कब्रें मिली हैं। तमाम कब्रें लकड़ी के ताबूत में बंद हैं, जो देखने में चारपाई जैसी हैं। उनके पाओं और दीवारों पर तांबे की प्लेटिंग थी, जिस पर तमाम तरह की आकृतियां उकेरी गई हैं। इतना ही नहीं, ताबूत में तांबे की कीलों का इस्तेमाल किया गया है। यहां मिले एक गढ्ढे में लगभग आठ फीट का ताबूत मिला है, जिसके पास दो रथ भी दफन मिले हैं।ताबूत के सिरहाने में मुकुट जैसी चीज के अवशेष भी मिले हैं। इतना ही नहीं, रथ का ढांचा तांबे का था, जो बचा हुआ है, लकड़ी का हिस्सा गल चुका है, लेकिन इसका आठ फीट का जुआ जस का तस मिला है। इसके अलावा, यहां मिली चीजों में तीन तलवारें, दो खंजर, एक ढाल, एक मशाल और एक हेलमेट मिला है। इन कब्रों के आसपास अलग-अलग आकार के पाॅटरीज, बर्तन, विभिन्न तरह के बीड्स, जिसमें सेमी प्रेशस स्टोन से लेकर सोने-चांदी जैसी धातुएं तक शामिल हैं।

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