छत्तीसगढ: अपने पुराने रूप में आई 1300 साल पुरानी गणेश जी की प्रतिमा

नई दिल्ली(2 फरवरी): छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में पहाड़ी पर विराजित ढोलकल गणेश की खंडित प्रतिमा को केमिकल ट्रीटमेंट के जरिए विशेषज्ञ मूल स्वरूप दे रहे हैं। बुधवार को प्रतिमा अपने पुराने रूप में आ गई। सोमवार तक प्रतिमा के 95 फीसदी हिस्से के टुकड़े मिल चुके थे।

- मंगलवार को गणेशजी का कान मिला। इसे ढूंढने डेप्युटी कलेक्टर आशीष देवांगन के नेतृत्व में करीब 100 ग्रामीण और जवान सुबह ही खाई में उतर गए थे। 10 बजे उन्हें कान मिल गया।

-अब इस प्रतिमा की पुनर्स्थापना की जाएगी, साथ ही ग्रामीण पूजा-अर्चना भी करेंगे। दंतेवाड़ा कलेक्टर सौरभ कुमार के मुताबिक, ढोलकल गणेश प्रतिमा का री-कंस्ट्रक्शन लगगभ पूरा हो गया है। ग्रामीणों के रीति-रिवाज के साथ पुनर्स्थापना की जाएगी।

-इस ऐतिहासिक स्थल के केंद्र और राज्य के पुरातत्व रिकॉर्ड में न होने से सुरक्षा और संरक्षण की जिम्मेदारी ग्रामीण निभाएंगे। उनकी मांग पर टूरिस्ट गाइड और रास्ते में पेयजल व दीगर सुविधाएं प्रशासन मुहैया कराएगा। ढोलकल की गणेश प्रतिमा का कान तीन दिन बाद मिल ही गया, जिसे मंगलवार को प्रतिमा के अन्य अंगों के साथ जोड़ने की प्रक्रिया शुरू हुई। शाम तक प्रतिमा अपने मूल स्वरूप में आने लगी। बुधवार को फाइनल टच दिया गया है।

-प्रतिमा के नीचे गिरने के बाद 56 टुकड़े एकत्र कर लिए गए थे, लेकिन कान नहीं मिल रहा था, जिसे मंगलवार को क्षेत्र के ग्रामीणों ने खाई में उतरकर खोज निकाला। बैलाडिला के ढोलकल पर्वत शिखर पर विराजित 10-11वीं सदी की गणेश प्रतिमा पुनर्निर्माण के बाद फिर मूल स्वरूप में नजर आएगी। अज्ञात लोगों ने प्रतिमा को करीब 50 फीट नीचे खाई में गिराकर क्षतिग्रस्त कर दिया था। पुरातत्वविद अरुण कुमार शर्मा के दिशा-निर्देश पर केमिकल ट्रीटमेंट के साथ इसे री-कंस्ट्रक्ट किया जा रहा है। पुनर्निर्माण के दौरान प्रतिमा के महत्वपूर्ण अंग कान नहीं मिलने से दिक्कत हो रही थी। इसे ढूंढने डिप्टी कलेक्टर आशीष देवांगन के नेतृत्व में क्षेत्र के करीब 100 ग्रामीण और जवान मंगलवार की सुबह ही खाई में उतर गए। दस बजे से पहले कान मिलने से उसे ऊपर लाकर जोड़ने का कार्य शुरू हुआ।

बताया गया कि प्रतिमा के 90 से 95 फीसदी हिस्से मिल चुके हैं। शेष स्थान को अन्य रासायनिक पदार्थों से भरा गया है।