बवाना विधानसभा उप-चुनाव: केजरीवाल की अग्निपरीक्षा

वरुण सिन्हा, नई दिल्ली (2 अगस्त): राजौरी गार्डन उपचुनाव और दिल्ली नगर निगम इलेक्शन में शर्मनाक हार के बाद बवाना विधानसभा उप-चुनाव सीएम केजरीवाल की नाक का सवाल बन गया है। आम आदमी पार्टी और कांग्रेस उम्मीदवार में चुनावी दंगल के लिए बुधवार को पर्चा दाखिल किया। उम्मीदवार अपनी-अपनी जीत के दावें कर रहे हैं।   बवाना विधानसभा दिल्ली की 12 आरक्षित सीटों में से एक है और आम आदमी पार्टी का ये दिल्ली में दूसरा उपचुनाव है। इससे पहले राजौरी गार्डन उपचुनाव में आम आदमी पार्टी उम्मीदवार की जमानत जब्त हुई थी। बवाना सीट भी आम आदमी पार्टी के विधायक के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। लगातार 6 चुनावी हार के बाद ये आम आदमी पार्टी का 7वां चुनाव है। शायद यही कारण है कि आम आदमी पार्टी के मुखिया और दिल्ली के सीएम ने भी बवाना में खूंटा गाड़ दिया है। अगर इस बार भी हार हुई तो इसका नकारत्मक असर पूरी दिल्ली और सबसे ज्यादा आरक्षित सीटों पर पड़ेगा। 2015 के चुनावों में सभी 12 आरक्षित सीटे आम आदमी पार्टी ने जीती थी। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन का कहना है कि आम आदमी पार्टी इस बार भी अपनी जमानत बचाने के लिए चुनाव लड़ रही है।

बवाना उपचुनाव इसलिए दिलचस्प है, क्योंकि जिस आम आदमी पार्टी के विधायक वेदप्रकाश सतीश ने ये सीट छोड़ी उसे बीजेपी ने अपना उम्मीदवार बनाया है। जबकि इस सीट से बीजेपी के विधायक रहे गुगन सिंह ने आम आदमी पार्टी का दामन थाम लिया है। हालांकि आम आदमी पार्टी ने संगठन के राम चन्द्र को चुनावी मैदान में उतारा है, लेकिन इस सीट पर हार या जीत सीधे केजरीवाल की छवि से जोड़कर देखी जाएगी।

कांग्रेस ने 2 बार चुनाव हार चुके उम्मीदवार सुरेंदर कुमार को फिर से मैदान में उतारा है। सुरेंदर कुमार 2013 से पहले बवाना सीट तीन बार जीत चुके थे। सुरेंदर 15 सालों के अपने कामों के आधार पर वोट मांग रहे है, आम आदमी पार्टी सीएम केजरीवाल के चेहरे पर और बीजेपी उम्मीदवार वेदप्रकाश पीएम नरेंद्र मोदी के नाम पर। देखना दिलचस्प होगा कि बवाना का वोटर किसे अपना नुमाइंदा बनाता है।