AK-LG विवाद: समझें कोर्ट के फैसले को...

नई दिल्ली (4 अगस्त): दिल्ली हाईकोर्ट ने सीएम अरविंद केरीजवाल और एलजी नजीब जंग के बीच चली आ रही लड़ाई पर एतिहासिक फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि दिल्ली अभी भी यूनियन टेरिटरी है और संविधान के अनुच्छेद-239 एए के तहत इसके लिए स्पेशल प्रावधान किया गया है। इस तरह से राजधानी दिल्ली में एलजी एडमिनेस्ट्रेटर हैं।

यूनियन टेरिटरी पर विशेष प्रावधान... हाईकोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद-239 और 239 एए को साथ-साथ देखने और बिजनस ट्रांजक्शन ऑफ एनसीटी दिल्ली 1993 के तहत दिल्ली यूनियन टेरिटरी है, लेकिन 69 संविधान संशोधन में इसमें विशेष प्रावधान किया गया है। यानी अनुच्छेद-239 एए के आने के बाद भी अनुच्छेद-239 हल्का नहीं होता।

एलजी सलाह मानने को बाध्य नहीं... चीफ जस्टिस जी. रोहिणी की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि दिल्ली सरकार की यह दलील कि एलजी दिल्ली सरकार के मंत्री परिषद की सलाह को मानने के लिए बाध्य हैं, इस दलील में दम नहीं है और आधारहीन है। इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।

एलजी का व्यू महत्वपूर्ण... हाईकोर्ट ने कहा कि जो संवैधानिक स्कीम है, उसके तहत दिल्ली के काउंसिल ऑफ मिनिस्टर उस फैसले के बारे में भी एलजी को अवगत कराएं और राय लें जिस कानून को बनाने का दायरा असेंबली के पास भी है। अनुच्छेद-239 एए का सब सेक्शन 3 (ए) यह प्रावधान करता है। अदालत ने कहा कि सरकार का कोई ऑर्डर तभी जारी होगा, जब उस मामले में एलजी की राय (व्यू) अलग न हो और वह अलग मत न रखते हों या फिर क्लॉज 4 के तहत केंद्र सरकार के रेफरेंस की जरूरत न हो।

21 मई का नोटिफिकेशन वैध... हाईकोर्ट ने कहा कि जो भी मामले और सर्विस 21 मई 2015 के नोटिफिकेशन के तहत असेंबली के दायरे से बाहर रखा गया है और जिसमें एलजी को अधिकार दिया गया है, उसके लिए केंद्र सरकार ने जो नोटिफिकेशन जारी किया है वह अवैध नहीं है। नोटिफिकेशन के तहत एलजी के जूरिडिक्शन के तहत सर्विस मैटर, पब्लिक ऑर्डर, पुलिस और लैंड से संबंधित मामले को रखा गया है। इसमें ब्यूरोक्रेट के सर्विस से संबंधित मामले भी शामिल हैं।

एंटी करप्शन ब्रांच नहीं ले सकता ऐक्शन... अदालत ने कहा कि 23 जुलाई 2014 और 21 मई 2015 का नोटिफिकेशन, जिसके तहत कहा गया है कि दिल्ली की एंटी करप्शन ब्रांच केंद्र सरकार के कर्मचारियों के खिलाफ ऐक्शन नहीं ले सकती उस नोटिफिकेशन में दखल की जरूरत नहीं है, क्योंकि सातवीं अनुसूचि के तहत दिल्ली के विधानसभा को ऐसा कानून बनाने का अख्तियार नहीं है।

सीएनजी फिटनेस मामले का जांच आयोग खारिज... दिल्ली सरकार के उस नोटिफिकेशन को भी हाईकोर्ट ने अवैध करार दे दिया है जिसके तहत दिल्ली सरकार ने सीएनजी फिटनेस सर्टिफिकेट लगाने के ठेके से संबंधित मामले की जांच के लिए जांच आयोग का गठन किया था। हाईकोर्ट ने कहा कि नियम के तहत इसके लिए एलजी से सहमति नहीं ली गई थी।

डीडीसीए मामले की जांच कमिशन भी अवैध... दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार के उस आदेश को भी अवैध करार दे दिया है जिसके तहत विजिलंस डिपार्टमेंट ने 22 दिसंबर 2015 को नोटिफिकेशन जारी करके डीडीसीए की अनियमितता की जांच का आदेश दिया था। इस मामले में भी एलजी की सहमति नहीं ली गई।

बिजली बोर्ड नॉमिनी को भी नहीं माना... हाईकोर्ट दिल्ली सरकार के उस फैसले को भी अवैध ठहराया है जिसमें दिल्ली सरकार ने बिजली वितरण कंपनियों के बोर्ड में नॉमिनी बनाया था। अदालत ने कहा कि इसके लिए सीएम ने एलजी के कम्यूनिकेशन के बिना फैसला लिया था और ऐसे में वह भी नहीं टिकता।

पावर डिपार्टमेंट का फैसला भी अवैध... साथ ही दिल्ली हाईकोर्ट ने उस फैसले को असंवैधानिक व अवैध करार दे दिया, जिसमें सरकार ने डीईआरसी से कहा था कि पावर सप्लाइ में बाधा के मामले में मुआवजा आदि के प्रावधान की बात कही थी। बिजली आपूर्ति में बाधा के लिए देय मुआवजा के संबंध में डीईआरसी के लिए 12 जून 2015 को जो पॉलिसी डायरेक्शन जारी करने के दिल्ली सरकार के कार्रवाई को कोर्ट ने गैर-संवैधानिक करार दिया क्योंकि इसके लिए उप राज्यपाल से राय नहीं ली गई थी।

एलजी के व्यू के बिना रेट तय मामला... दिल्ली सरकार के रेवेन्यू डिपार्टमेट ने 4 अगस्त 2015 को ऐग्रिकल्चर लैंड की बिक्री और ट्रांसफर के मामले में स्टैंप ड्यूटी के मामले में रेट तय किया था। इस मामले में भी एलजी का व्यू नहीं लिया गया था इस कारण हाई कोर्ट ने इसे अवैध करार दे दिया है। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में भी संविधान के प्रावधान के तहत एलजी का व्यू जरूरी है। हालांकि स्पेशल पब्लिक प्रोसिक्युटर की नियुक्ति के मामले में हाई कोर्ट ने कहा है कि एलजी को पावर है कि वह नियुक्ति करेंगे लेकिन इसके लिए वह मंत्री परिषद से सलाह लेंगे।