अरुणाचल में टला बहुमत परीक्षण, नबाम तुकी का इस्तीफा

नई दिल्ली(16 जुलाई): अरुणाचल प्रदेश में आज होने वाले शक्ति परीक्षण से ठीक पहले राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदल रहे हैं। कांग्रेस की तरफ से शक्ति परीक्षण नहीं कराने का अनुरोध राज्यपाल से किया गया था। पार्टी का कहना था कि सर्वसहमति से विधायक दल ने पेमा खांडू को नेता चुन लिया है इसलिए फ्लोर टेस्ट की प्रक्रिया रद्द कर दी जाए। अरुणाचल में अब फ्लोर टेस्ट टल गया है। बहुमत साबित करने पर खांडू राज्य के अगले मुख्यमंत्री हो सकते हैं।

इससे पहले कांग्रेस ने नए दांव के तहत शक्ति परीक्षण से ऐन पहले मुख्यमंत्री नाबाम तुकी ने अरुणाचल प्रदेश कांग्रेस विधायक दल के नेता पद से इस्तीफा दे दिया। उनकी जगह पेमा खांडू को विधायक दल का नया नेता चुना गया है।बाद कांग्रेस ने राज्यपाल से फ्लोर टेस्ट नहीं कराने की अपील की थी। पार्टी प्रवक्ता बामांग फेलिक्स ने कहा, 'पार्टी ने सर्वसहमति से पेमा खांडू को विधायक दल का नेता चुन लिया है। हम राज्यपाल से अनुरोध करेंगे कि वह फ्लोर टेस्ट रद्द कर दें। हमारे पास 47 विधायकों का समर्थन है।'

कांग्रेस ने इसलिए चली यह चाल!

दरअसल 'सीएम' बदलने के पीछे कांग्रेस की बहुमत साबित करने की रणनीति है। माना जा रहा है कि कांग्रेस के बागी विधायक खांडू के नाम पर पार्टी के साथ एकजुट हो सकते हैं। कांग्रेस के 20 बागी विधायकों ने संकेत दिए थे कि पार्टी अगर नेतृत्व में परिवर्तन करती है तो वह बगावती तेवर छोड़ पार्टी में वापस लौट सकते हैं।अगर ये विधायक सदन में कांग्रेस का समर्थन करते हैं तो पार्टी के पास 35 विधायकों का समर्थन होगा। 60 सदस्यों वाले प्रदेश की विधानसभा में बहुमत के लिए 31 विधायकों का समर्थन चाहिए। फिलहाल, कांग्रेस के पास सिर्फ 15 सदस्य हैं। ऐसे में अगर 20 बागियों की घर वापसी होती है, तो कांग्रेस आसानी से बहुमत साबित कर लेगी।

उधर, कांग्रेस मामले को कोर्ट में ले जाने की तैयारी में भी है। प्रदेश के स्पीकर नबाम रेबिया ने यह कह कर सेशन बुलाने में असमर्थता जताई है कि इतने कम समय में असेंबली सेशन नहीं बुलाया जा सकता। रिपोर्ट्स के मुताबिक कांग्रेस राज्यपाल के अधिकारों को लेकर अदालत से स्पष्टीकरण भी पूछ सकती है। कांग्रेस का कहना है कि शक्ति परीक्षण के लिए ज्यादा वक्त दिया जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद गर्वनर ने शनिवार को तुकी को बहुमत साबित करने के लिए कहा था। तुकी ने महज दो दिन में बहुमत साबित करने की जगह गर्वनर तथागत रॉय से 10 दिन की मोहलत मांगी, जिसे गर्वनर ने खारिज कर दिया था।

अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने अहम फैसला सुनाते हुए केंद्र की बीजेपी सरकार को बड़ा झटका दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने अरुणाचल प्रदेश में कांग्रेस सरकार बहाल करते हुए राष्ट्रपति शासन रद्द कर दिया था। कोर्ट के फैसले के बाद कांग्रेस के बागी किलखो पुल की सरकार की जगह नबाम तुकी ने मुख्यमंत्री के रूप में कामकाज संभाल लिया।