नोटबंदी के बाद पैसे को तरसे अलगाववादी और नक्सलवादी: अरुण जेटली

नई दिल्ली (21 अगस्त): मोदी सरकार ने 2016 नवंबर में 500 और 1000 नोटों पर बैन लगा दिया। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने रविवार को कहा कि नोटबंदी के कारण भारत के कई हिस्सों में माओवादी और जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी धन संकट से जूझ रहे हैं। नोटबंदी से ही इन्हें फंड के लिए तरसना पड़ा। वे मुंबई भाजपा के अध्यक्ष आशीष शेलर की ओर से आयोजित कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे थे। इस दौरान मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस भी उनके साथ मौजूद थे। 

लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि नोटबंदी के बाद से कश्मीर में पत्थरबाजों की संख्या और घटनाओं में गिरावट आई है। नोटबंदी से पहले जिन पत्थर बाजों की संख्या हजारों में होती थी वह अब सिमटकर महज 25 रह गई है। नोटबंदी के बाद सिर्फ कश्मीर में अलगाववाद ही नहीं बल्कि विभिन्न प्रदेशों में फैला माओवादी भी पैसों के लिए तरस गए। नवंबर 2016 में उच्च मूल्य को नोटों को बंद करने के इस कदम के बारे में विस्तार से बताते हुए जेटली ने कहा कि जो पैसा पहले से अर्थव्यवस्था के बाहर चल रहा था वह औपचारिक बैंकिंग प्रणाली में आ गया है। 

भाजपा के 'न्यू इंडिया' विजन के बारे में उन्होंने बताया कि हमारी पहली प्राथमिकता रक्षा और ग्रामीण क्षेत्रों का विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर को डेवलप करना है।  हमारे पास विश्वस्तरीय संस्थान हैं इसके बावजूद गोरखपुर जैसा हादसा होना बहुत ही शर्मनाक है। अंत में जेटली ने सरकार की तीन साल की उपलब्धियों का भी बखान किया और सरकार की आगे की योजनाओं के बारे में बताया।