पुराने नोटों की तरह नहीं छपेंगे नए नोट !

नई दिल्ली (17 दिसंबर): नोटबंदी के बाद देशभर कैश क्रंच है। नोटबंटी के 38वें दिन भी देशभर में लोग कैश के लिए बैंक और एटीएम के बाहर खड़े नजर आ रहे हैं। वहीं सरकार कैशलेस इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए डिजिटल ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने के लिए लोगों को प्रोत्साहित कर रही है।

इन सबके बीच वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इशारों-इशारों में कहा है कि अब देश नोट की स्थिति 8 दिसंबर से पहले जैसी नहीं होगी। नोटबंदी से पहले देशभर में तकरीबन साढ़े 15 लाख करोड़ रुपये के 500 और 1000 के नोट चलन में थे। लेकिन विमुद्रीकरण के बाद अब सरकार का इरादा फिलहाल इतने ही राशि की रकम को जारी करने का नहीं है।

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने संकेत दिया है कि 15.44 लाख करोड़ रुपये के पुराने अमान्य नोटों के स्थान पर इतनी ही राशि की नई करेंसी जारी नहीं की जायेगी। उन्होंने कहा कि डिजिटल करेंसी अंतर को पूरा करेगी। वित्त मंत्री ने 500 और 1,000 रुपये के पुराने नोटों को अमान्य किए जाने को एक साहसिक कदम बताया और कहा कि भारत में इतनी क्षमता है कि वह इस तरह के कदम उठा सके और इसका अनुभव उठा सके।

जेटली ने कहा कि उच्च मूल्य वर्ग के नोटों को अमान्य करने के फैसले से एक नई सोच और सामान्य चलन स्तर बना है। इससे पहले, पिछले सात दशक से जो सामान्य चलन था, वह स्वीकार्य नहीं है। जेटली ने फिक्की की 89 वीं वार्षिक आम बैठक को संबोधित कहते हुए कहा कि नोटों को अमान्य करने के कदम से अर्थव्यवस्था, चलन में अधिक नकदी की समस्या से बाहर निकलेगी। अधिक नकदी से कर चोरी, कालाधन और अपराध के लिये करेंसी का इस्तेमाल जैसी समस्याएं खड़ी होती हैं।