कैश वाली अर्थव्यवस्था ने जो कुरीतियां पैदा की थीं, वे कैशलेस व्यवस्था से दूर हो होंगी: अरुण जेटली

नई दिल्ली ( 25 दिसंबर ): डिजी-धन मेला में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने साफ किया कि सरकार कैशलेस इकॉनमी बनाना चाहती है, इसका मतलब यह नहीं है कि कैश नहीं होगा, बल्कि कैश कम होगा। उन्होंने यह भी कहा, 'आम जनता को यह बात समझ गई है, लेकिन विरोधी दल इस बात को समझने में वक्त लगा रहे हैं। कैश वाली अर्थव्यवस्था ने जो कुरीतियां पैदा की थीं, वे कैशलेस व्यवस्था से दूर हो जाएंगी।'जेटली ने बताया कि आधार कार्ड पेमेंट खासतौर पर उन लोगों के लिए शुरू किया गया, जिनके पास कार्ड्स और मोबाइल फोन्स नहीं है और लेन-देन के लिए वे सिर्फ अपने अंगूठे के निशान का ही इस्तेमाल कर सकते हैं।जेटली ने कहा लकी ड्रॉ स्कीम से देश में डिजिटल ट्रांजैक्शन्स को प्रमोट करने में बड़ी मदद मिलेगी। उन्होंने साउथ कोरिया का हवाला देते हुए कहा कि ऐसी स्कीमें वहां बहुत लोकप्रिय हुईं। साथ ही, उन्होंने भरोसा दिलाया कि ऐसी मुहिम से एक बेहतर देश और साफ-सुथरी इकॉनमी का निर्माण होगा।अरुण जेटली का कहना है कि कैश इकॉनमी के ऊपर भारी निर्भरता की वजह से ही नकली करंसी से लेकर आतंकवाद जैसी समस्याएं पनपीं।उन्होंने कहा, 'एक वक्त था, जब देश की सिर्फ 1% जनता के पास मोबाइल फोन्स थे। लेकिन सिर्फ 20 सालों के भीतर भारत में करीब 90% लोगों के पास मोबाइल फोन्स हैं।'

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने दुनिया के शीर्ष उद्योगपतियों में शामिल बिल गेट्स द्वारा डिजिटल इकॉनमी पर उनको दिए गए एक बड़े सुझाव का जिक्र किया। जेटली ने बताया कि माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक गेट्स ने उनसे कहा था कि भारत में 100 करोड़ से ज्यादा लोगों के पास मोबाइल फोन्स और 109 करोड़ के पास आधार कार्ड हैं, इसलिए भारत में डिजिटल इकॉनमी जरूर बूम करेगी।