#BUDGET2017: अब 2000 से ज्यादा कैश नहीं ले पाएंगे राजनीतिक दल

नई दिल्ली (1 फरवरी): वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आम बजट में राजनीतिक चंदे पर बड़ा चोट किया। वित्त मंत्री ने ऐलान किया कि अब सभी राजनीतिक पार्टियां एक व्यक्ति से कैश में सिर्फ 2000 रुपये तक ही ले सकती हैं। 2000 से ज्यादा के चंदे का हिसाब देना होगा, यानी राजनीतिक दल 2000 से अधिक चंदा ऑनलाइन या चेक के तौर पर ही ले सकते हैं।

इससे पहले राजनीतिक दलों को अपनी आय में से 20 हजार से कम के चंदे को घोषित करने से छूट मिली हुई थी। अभी हाल ही में आई एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक राजनीतिक दलों की कुल घोषित आय 11,367.34 करोड़ बताई गई थी जिसमें से 7,832.98 करोड़ रुपये की आय का जरिया अघोषित था। यानी ये 20-20 हजार रुपये के कम के चंदे बताए गए थे जिनका रिकॉर्ड रखना या बताना उनके लिए जरूरी नहीं था।

ब्लैक मनी पर बड़ा वार

जेटली की इस घोषणा को राजनीतिक पार्टियों में खपाए जा रहे काले धन के खिलाफ बड़ा वार माना जा रहा है, क्योंकि अब तक राजनीतिक दल अपनी ज्यादातर कमाई ऐसे चंदे से बताते रहे हैं जो उन्हें 20 हजार रुपये से कम का मिला है। ऐसे में ये काली कमाई खपाने का जरिया बन जाता था। अब राजनीतिक दलों को 2000 रुपये से ज्यादा के मिले हर चंदे का हिसाब रखना होगा। यानी वो चंदा किस व्यक्ति ने दिया। उसकी रसीद कहां है।

एडीआर ने ये रिपोर्ट 2004-05 से लेकर साल 2014-15 के बीच राजनीतिक दलों को मिले चंदे, चुनाव आयोग और आयकर विभाग को जमा की गई रिपोर्ट के आधार पर बनाई थी। रिपोर्ट के मुताबिक बीजेपी को इस दौरान कुल 2,125 करोड़ रुपए का चंदा मिला जिसका 65 फीसदी हिस्सा अघोषित आय से आया था। रिपोर्ट में कांग्रेस का दामन भी साफ नहीं था। रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस की कुल आय का 83 फीसदी हिस्सा अघोषित जरिए से आया था।

समाजवादी पार्टी को मिले चंदे का 94 फीसदी और अकाली दल को मिले चंदे की 86 फीसदी आय अघोषित स्रोतों से जमा हुई थी। रिपोर्ट में घोषित स्रोतों से जमा राजनीतिक दलों की कुल घोषित आय 1,835.63 करोड़ रही जो उनकी कुल कमाई का महज 16 फीसदी था।

रिपोर्ट में राजनीतिक दलों की कुल कमाई 11,367.34 करोड़ बताई गई है जिसमें से 7,832.98 करोड़ रुपए अघोषित आय थी यानी कि इन पार्टियों की 69 फीसदी कमाई का जरिया जनता के सामने नहीं था। एडीआर के आंकड़े कहते हैं कि राष्ट्रीय राजनीतिक दलों की अघोषित आय 2004-05 में 274.13 करोड़ थी जो कि साल 2014-15 में 313 फीसदी बढ़कर 1130.92 करोड़ हो गई। वहीं क्षेत्रीय पार्टियों की कमाई में 652 फीसदी का इजाफा हुआ है।