जानें क्या हैं अनुच्छेद 35 (A), जिसपर मचा है विवाद...


नई दिल्ली (29 जुलाई):
जम्मू-कश्मीर की सीएम महबूबा मुफ्ती ने अनुच्छेद 35 (A) पर बयान देकर राजनीति गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। दरअसल अनुच्छेद 35 (A) को जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले संविधान से हटाने की मांग हो रही है। इसी मामले में सुप्रीम कोर्ट इसपर दायर याचिका पर बहस कर रहा है।

कश्मीर को संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत विशेष दर्जा दिया गया था। इसका मकसद कश्मीर के लोगों की अलग पहचान को बरकरार रखना था। इसके तहत सिर्फ रक्षा, विदेश नीति, वित्त और संचार जैसे मामलों में ही भारत सरकार दखल दे सकती है। राज्य की नागरिकता और अन्य मौलिक अधिकार राज्य के अधिकार क्षेत्र में है। इसकी वजह से ही इस राज्य का अलग झंडा और प्रतीक चिह्न है।

क्या हैं अनुच्छेद 35 (A)...

- 14 मई 1954 को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने एक आदेश पारित किया था। इस आदेश के जरिए भारत के संविधान में एक नया अनुच्छेद 35 (A) जोड़ दिया गया।

''ये अनुच्छेद 35 (A) जम्मू-कश्मीर की विधान सभा को ये अधिकार देता है कि वो 'स्थायी नागरिक' की परिभाषा तय कर सके और उनकी पहचान कर विभिन्न विशेषाधिकार भी दे सके।''

- 1947 में बंटवारे के वक्त हज़ारों परिवार पाकिस्तान से आकर जम्मू में बसे थे। इन हिंदू परिवारों में लगभग 85 फीसदी दलित हैं। इस अनुच्छेद 35 (A) की वजह से इन्हें ना तो यहां होने वाले चुनावों में वोट देने का अधिकार है, न सरकारी नौकरी पाने का और न ही सरकारी कॉलेजों में दाखिले का। ये अपने देश में शरणार्थी की तरह है।

अनुच्छेद 370 पर हमेशा बहस होती है। क्योंकि लोग सिर्फ इसी के बारे में जानते हैं, लेकिन जानकारों का कहना है कि 35 (A) का असर 370 से ज्यादा हानिकारक है। क्योंकि 70 साल से रह रहे लाखों लोगों को स्थानीय निवासी बनने से रोक रहा है।