ऐसे आधुनिक हथियारों से ऑपरेशन ऑल आउट को अंजाम दे रही है सेना

आसिफ सुहाफ, श्रीनगर (17 अगस्त): सीआरपीएफ के जांबाज़ कमांडो ऑपरेशन ऑल आउट में चुन-चुनकर आतंकियों को मार रही है। इसी के साथ इस ऑपरेशन में सेना आधुनिक हथियारों का इस्तेमाल भी कर रही है। ऐसे हथियार जो घरों में छुपे आतंकियों की पहचान और उनकी लोकेशन का पता लगा लेते हैं। ऑपरेशन ऑल आउट पर निकलते समय ये कमांडो इन आधुनिक हथियारों से लैस होते हैं।

दक्षिणी कश्मीर को आतंक की पनाहगाह कहें तो गलत नहीं होगा। घाटी में खून खराबे की इबारत यहीं से लिखी जाती है। हिज़बुल, लश्कर औऱ जैश के आतंकी और कमांडर यहीं पर अपना ठिकाना बनाते हैं। इसीलिए सीआरपीएएफ के कमांडोज़ ने ऑपरेशन ऑल आउट भी यहीं से शुरू किया है। अब तक जितने भी आतंकी मारे गए हैं वो दक्षिणी कश्मीर के चार ज़िलों पुलवामा, शोपियां, कुलगाम और अनंतनाग में ही मारे गए हैं।

ऑपरेशन ऑल आउट के लिए और आतंकियों के ठिकानों का पता लगाने के लिए बाकायदा एक कंट्रोल रूम बनाया गया है। आधुनिक मशीनों से लैस इसी कंट्रोल रूम में सबसे पहले आतंकियों से जुड़ी खबरें पहुंचती हैं। इन दिनों दक्षिणी कश्मीर में हर रोज़ आतंकियों से मुठभेड़ होती है, इसीलिए CRPF के जवान 24 घंटे अलर्ट रहते हैं।

मिशन पर निकलने से पहले कमांडो आधुनिक हथियारों से लैस होते हैं। हथियार जिसका निशाना अचूक होता है और आतंकियो की सीना चीर देता है। ऑटोमेटिक गन के साथ भी कमाडो मिशन पर जाते हैं, जिसमें ऐसी टैक्नॉलोजी लगी होती है जो घरों में छुपे आतंकियों का ठिकाना तक बता देती है। इनके पास इज़रायली मेड कारनर शाट गन है, जो फोल्ड भी होती है और छुपे हुए आतंकी की तस्वीर मॉनीटर में दिखाती है।

ऑपरेशन ऑल आउट के कमांडो तीन टुकड़ियों में बंट जाते हैं। एक टुकड़ी का नाम है लॉ एंड ऑर्डर, जिसके ज़िम्मा पत्थरबाज़ों से निमटना और रिहाइश इलाकों में नुकसान होने से बचाना होता है। दुसरी टुकड़ी का काम उन जगहों का पता लगाना होता है, जहां आतंकी छुपे होते हैं और तीसरी टुकड़ी की ज़िम्मेदारी आतंकियों को खत्म करने की होती है।