पाकिस्तान में पांचवीं बार होने वाला है तख्तापलट!

नई दिल्‍ली (18 अप्रैल): पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में पचास डिग्री पारे के बीच इस्लमाबाद में सियासत बहुत उबल रही है। शायद पहली बार पाकिस्तान में ऐसा हुआ है कि इस वक्त ना तो प्रधानमंत्री नवाज शरीफ, ना गृहमंत्री चौधरी निसार, ना विरोधी इमरान खान, ना ही राष्ट्रपति ममनून हुसैन मौजूद हैं। ऐसे हालात में पूरी दुनिया की नजर पाकिस्तान पर लगी है। इस डर की आशंका के बीच, क्या पाकिस्तान में पांचवीं बार तख्तापलट होने वाला है ?

पाकिस्तान में लोकतंत्र के पहले चेहरे प्रधानमंत्री नवाज शरीफ इस वक्त पाकिस्तान में नहीं हैं। पिछले बुधवार को रोम के लिए निकलते वक्त नवाज शरीफ ने अचानक कार्यक्रम बदला और मॉस्को पहुंच गए। फिर नवाज शरीफ मॉस्को से लंदन चले गए। नवाज सरकार में नंबर-2 की हैसियत रखने वाले चौधरी निसार भी लंदन में ही हैं। आंतरिक सुरक्षा मंत्री चौधरी निसार भी नवाज शरीफ के लंदन पहुंचने के बाद पाकिस्तान से चले गए हैं।

पाकिस्तान में लोकतंत्र में नंबर तीन विरोधी नेता और तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के मुखिया इमरान खान भी लंदन चले गए हैं। चौधरी निसार और इमरान खान तो एक ही हवाई जहाज से लंदन गए। पाकिस्तान पीपल्स पार्टी के मुखिया आसिफ अली जरदारी पहले से लंदन में हैं। पाकिस्तान के राष्ट्रपति ममनून हुसैन भी देश से बाहर हैं। JUIF पार्टी के मुखिया मौलाना फजलुर्ररहमान भी विदेश में हैं। यानी प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, सरकार में नंबर दो नेता, विरोधी इमरान खान, यहां तक कि जरदारी भी पाकिस्तान छोड़ इस वक्त लंदन में हैं और पाकिस्तान में पत्ता हिल रहा है सेना प्रमुख राहिल शरीफ के इशारे पर। तो क्या पाकिस्तान में पांचवीं बार तख्ता पलट होने वाला है ?

पाकिस्तान में सत्ता का केंद्र इस्लामाबाद इस वक्त खाली पड़ा है। पांच दिन पहले ना जाने कौन सी बीमारी का इलाज कराने के नाम पर नवाज शरीफ पाकिस्तान से उड़े और लंदन पहुंच गए। कहा जा रहा है कि नवाज एक बीमारी के इलाज के लिए लंदन गए हैं। पर सवाल ये उठ रहे हैं कि ये कैसी बीमारी है जिसकी जांच पाकिस्तान में नहीं हो सकती थी? नवाज शरीफ की ये कौन सी बीमारी है जिसमें नवाज शरीफ बाकायदा लंदन में प्रेस कॉन्फ्रेंस भी कर रहे हैं और इस रहस्यमयी बीमारी में नवाज अपने वतन कब लौटेंगे किसी को नहीं पता। पाकिस्तान के ऐसे माहौल में इस वक्त पाकिस्तान में कहा जा रहा है कि पत्ता भी हिल रहा है तो वो सेना प्रमुख जनरल राहिल शरीफ के इशारे पर।

याद करिए 1999 में नवाज शरीफ जब श्रीलंका गए हुए थे तभी लौटते हुए परवेज मुशर्रफ ने उनकी सरकार का तख्तापलट कर दिया था। इसके बाद सत्ता से बेदखल हुए नवाज 2008 में ही पाकिस्तान लौट पाए थे। 2013 में पीएम बनने के बाद से ही उन्हें पाकिस्तानी सेना की तरफ से जबरदस्त दबाव झेलना पड़ रहा था। मुमकिन है पनामा पेपर्स के खुलासे के बाद नवाज शरीफ को फिर गिरफ्तारी और तख्तापलट का डर सता रहा हो इसलिए उन्होंने लंदन भागने में ही भलाई समझी है।

बताया जा रहा है कि 27 मार्च को पाकिस्तान में जब ईस्टर के मौके पर धमाका हुआ था, उसके बाद जितने फैसले नवाज शरीफ ने लिए उनसे कहीं ज्यादा आगे बढ़कर सेना प्रमुख राहिल शरीफ ने कदम उठाया। तब राहिल शरीफ ने कुछ ऐसे फैसले भी लिए जिसमें नवाज शरीफ सरकार को भरोसे तक में नहीं लिया गया। उसके बाद पनामा पेपर्स लीक में नवाज शरीफ के परिवार का नाम आने के बाद माना जा रहा है कि नवाज की हालत पाकिस्तान में काफी कमजोर हो गई है। हांलाकि पाकिस्तान को करीब से जानने वाले ये भी मानते हैं कि सेना ही जब सबकुछ संभाल रही है तो तख्तापलट की जरूरत नहीं पड़ेगी।