VIDEO: न्यूज 24 का बड़ा खुलासा, आपकी कमाई पर आतंकियों की ऐश

नई दिल्ली (16 जुलाई): आज न्यूज 24 जो खुलासा करने जा रहा उसे देखकर आपको खून खौल जाएगा। जिस देश में गरीब की थाली की कीमत 25 से 30 रुपए आंकी जाती है, वहीं जेल में बंद खतरनाक आतंकवादियों और अलगाववादियों को रोज 110 रुपए से ज्यादा की खाने की थाली दी जा रही है। जबकि देश की रक्षा के लिए जान की बाजी लगाने वाले जवानों के राशन-पानी की कीमत सिर्फ 96 रुपए आंकी गई है।


सातवें वेतन आयोग की रिपोर्ट के बाद फौज में फ्री राशन पानी बंद कर दिया गया है। इसके बदले हर दिन के राशन पानी की एक कीमत तय कर दी गई है और ये कीमत है 96 रुपए। यानि एक फौजी के खाने की कीमत सिर्फ 96 रुपए और एक आतंकवादी के खाने की कीमत 110 रुपए। यानि देश के दुश्मन के खाने की थाली एक फौजी के खाने की थाली से 14 रुपए ज्यादा।


बीएसएफ के एक जवान के लिए हर दिन 400 ग्राम आटे का राशन तय है तो आर्मी के जवान के लिए 310 ग्राम जबकि जम्मू कश्मीर की जेल में बंद कैदियों के लिए इसकी मात्रा 600 ग्राम तय है। बीएसएफ के एक जवान को 220 ग्राम चावल रोजाना मिलता है तो आर्मी के जवान को 310 ग्राम जबकि जम्मू कश्मीर की जेल में कैदियों के लिए ये 600 ग्राम तय है।

यही नहीं जम्मू कश्मीर की जेलों में बंद आतंकियों, अलगाववादियों और पत्थरबाजों के खाने पर हर दिन करीब 110 रुपए से भी ज्यादा खर्च किए जाते हैं तो वहीं देश के लिए जान कुर्बान करने को तैयार रहने वाले बीएसएफ के जांबाज जवानों के लिए राशन की रकम सिर्फ 96.83 रुपए है। जम्मू कश्मीर की जेलों में आतंकियों की मेहमाननवाजी पर होनेवाला ये खर्च यूं ही मुंह नहीं चिढ़ा रहा।


खून जमा देने वाली सर्दी में सरहद पर खड़े रहने वाले, दिन रात दुश्मनों से लोहा लेने वाले और आतंकियों को मुंहतोड़ जवाब देनेवाले देश के जवानों को हर दिन सिर्फ 3900 कैलोरी तक का खाना दिया जाता है तो वहीं जम्मू-कश्मीर की जेलों में मुफ्त की रोटियां तोड़ने वाले आतंकियों को हर दिन 2700 कैलोरी का खाना दिया जाता है जिनका काम सिर्फ हिंदुस्तान की बर्बादी की साजिश रचना है।


अगर हम देश के जवानों के खाने की तय कैलोरी की तुलना अमेरिकी जवानों और यूएम शांति मिशन में तैनात जवानों से करें तो आंकड़े और भी हैरान करनेवाले हैं। अमेरिका अपने जवानों को हर दिन 5 हजार कैलोरी का खाना देता है। वहीं यूएन शांति मिशन में तैनात जवानों के लिए भी 5000 कैलोरी की डाइट तय है। जबकि भारतीय जवानों के सामने चुनौतियां कई गुना ज्यादा हैं और सुविधा उनके मुकाबले बेहद कम।


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