अर्जन सिंह ने 1965 की जंग में पाकिस्तान को ऐसे चटाया था धूल

नई दिल्ली (16 सितंबर): 1965 की लड़ाई में पाकिस्तान के धूल चटाने वाले एयर मार्शल अर्जन सिंह अब हमारे बीच नहीं रहे हैं। अर्जन सिंह ने 98 साल की उम्र में दिल्ली के आरआर हॉस्पिटल में आखिरी सांस ली। उन्हें शुक्रवार को दिल का दौरा पड़ने का बाद दिल्ली के आरआर हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। 

मार्शल ऑफ इंडियन एयरफोर्स अर्जन सिंह भारतीय एयरफोर्स के इतिहास में पहले ऐसे प्रमुख थे जिन्होंने पहली बार देश के किसी युद्ध में एयरफोर्स का नेतृत्व किया था। 1 अगस्त 1964 को अर्जन सिंह एयर मार्शल की पदवी के साथ चीफ ऑफ एयर स्टाफ बनाए गए थे। 1965 में पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ ऑपरेशन ग्रैंड स्लैम को अंजाम दिया और पाकिस्तानी टैंकों ने अखनूर शहर पर धावा बोल दिया। एयर चीफ अर्जन सिंह की यह सबसे बड़ी चुनौती थी।

पाकिस्तानी हमले की खबर पाते ही रक्षा मंत्रालय ने तीनों सेना प्रमुखों को तलब किया और कुछ मिनटों की इस मुलाकात में अर्जन सिंह से पूछा गया कि वह कितनी जल्दी पाकिस्तान के बढ़ते टैंकों को रोकने के लिए एयर फोर्स का हमला कर सकते हैं। अर्जन सिंह ने हमला करने के लिए सिर्फ एक घंटे का समय मांगा।

अपने वादे के मुताबिक अर्जन सिंह अपनी बात पर खरे उतरे और अखनूर की तरफ बढ़ रहे पाकिस्तानी टैंक और सेना के खिलाफ पहला हवाई हमला 1 घंटे से भी कम समय में कर दिया। इसके बाद पूरे युद्ध के दौरान अर्जन सिंह ने वायू सेना के नेतृत्व के साथ-साथ पाकिस्तान के खिलाफ इस युद्ध में बेहद अहम भूमिका निभाई।

ऑपरेशन ग्रैंड स्लैम के तहत पाकिस्तानी राष्ट्रति और जनरल अयूब खान ने जबरन कश्मीर पर कब्जा करने की योजना बनाई। लेकिन जनरल अयूब खान ने भारतीय सेना और भारतीय एयरफोर्स की क्षमता को कमतर आंक कर अपनी योजना बनाई। लिहाजा, हमले के पहले घंटे में ही हुए इंडियन एयरफोर्स के हमले से पाकिस्तान का पूरा प्लान फेल हो गया।