'सबसे रहस्यमयी तारे' के पास है एलियंस का डेरा!

नई दिल्ली (25 मई) : ये दावा इतना हैरान करने वाला है कि इसे पहली बार सुनने में कोई गंभीरता से नहीं लेगा। लेकिन एस्ट्रोनॉमर्स (खगोलविद) हवा में तीर नहीं मार रहे जब वो कह रहे है कि बहुत दूर सूरज के चारों ओर एक 'एलियन मेगास्ट्रक्चर' चक्कर काट रहा है।

मिरर की रिपोर्ट के मुताबिक स्टारगेज़र्स (तारों पर नज़र रखने वाले) के एक ग्रुप ने 'गेलेक्सी के सबसे रहस्यमयी तारे'  की पहेली को सुलझाने के लिए पर्याप्त पैसा इकट्ठा करने के लिए मुहिम शुरू की है। इस रहस्यमयी तारे को KIC 8462852 का नाम दिया गया है। इसे साधारण भाषा में टैब्बी स्टार भी कहा जाता है।  

येल यूनिवर्सिटी ने एक लाख डॉलर एकत्र करने के लिए किकस्टार्टर क्राउडफंडिंग मुहिम शुरू की है। इससे पहेली को हल करने के लिए आवश्यक टेलीस्कोप टाइम सुनिश्चित किया जा सकेगा।

टैबी स्टार के विचित्र ढंग से टिमटिमाने को पहली बार नोटिस करने वाले खगोलविद ताबेता बोयाजियान ने लिखा है कि अभी तक ऐसी कोई स्थापित थ्योरी नहीं है जिससे कि इस तारे के विचित्र बर्ताव की वजह का पता चलता हो। ताबेता के निक नेम पर ही इस स्टार को टैबी स्टार नाम दिया गया है।

व्हाट द फ्लक्स नाम के पेपर में ताबेथा ने लिखा है कि इतनी दूर स्थित तारे का प्रकाश क्यों समय समय पर मध्यम पड़ता है। इस पर कुछ और खगोलविदों का मानना है कि ये प्रभाव इसके पास स्थित एक मेगास्ट्रक्चर (डायसन स्फेयर) की वजह से होता है। ये थ्योरिटिकल पावर प्लेनेट है जो सूरज से ली ऊर्जा को उपजाता है। लेकिन ये थ्योरी अति विवादित है जिसकी अभी तक पुष्टि नहीं की गई है।

कुछ खगोलविदों का मानना है कि तारे के पास से धूमकेतुओं के गुजरने की वजह से टिमटिमाना होता है।

ताबेता का मानना है कि क्राउडफंडिंग से इतनी रकम जुटा ली जाएगी कि पता लगाया जा सके तारे के आसपास क्या हो रहा है। इस प्रोजेक्ट से मिले आंकड़ों का इस्तेमाल उन सभी परिदृश्यों की पड़ताल में किया जाएगा जिससे कि पता चले कि तारे की चमक क्यों घटती-बढ़ती है।

ताबेता ने कहा कि ये संभव है कि अभी तक जो भी प्राकृतिक स्पष्टीकरण दिए गए हैं उनके हिसाब से सतत टिमटिमाना नहीं होष इस तरह का डेटा हमें तत्काल इस निष्कर्ष की ओर भी नहीं ले जाएगा कि 'एलियन मेगास्ट्रक्चर अवधारणा' सही है। किकस्टार्टर कैंपेन के लिए अभी तक 18,784 डॉलर एकत्र किए जा चुके हैं। अभी इसके 25 दिन और बाकी हैं।