'1 लाख साल में पहली बार आर्कटिक से इस साल गायब हो जाएगी बर्फ'

नई दिल्ली (5 जून): इस साल या फिर अगले साल आर्कटिक समुद्र की बर्फ गायब हो जाएगी। ऐसा 1 लाख साल में पहली बार होगा। यह दावा किया है, एक जाने माने वैज्ञानिक ने। जो भौगोलिक परिवर्तन को लेकर काफी चिंता पैदा करता है।

ब्रिटिश अखबार 'द इंडिपेंडेंट' की रिपोर्ट के मुताबिक, यूएस नेशनल स्नो एंड आइस डाटा सेंटर ने कुछ सैटेलाइट तस्वीरें उपलब्ध कराई हैं। जिनसे पता चलता है कि इस साल 1 जून तक यहां सिर्फ 1.11 करोड़ वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में बर्फ थी। जबकि पिछले 30 साल में यहां औसतन करीब 1.27 करोड़ वर्ग किलोमीटर एरिया में बर्फ मौजूद थी। 15 लाख वर्ग किलोमीटर से ज्यादा का यह इलाका यूनाइटेड किंगडम को 6 बार जोड़ने के बराबर है।

कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के 'पोलर ओशन फिजिक्स' ग्रुप के हेड प्रोफेसर पीटर वैडहैम्स ने ये दावे किए हैं। उनका कहना है कि हालिया आंकड़ों से उनका 4 साल पहले किया गया एक विवादित अनुमान की पुष्टि हुई है। उन्होंने कहा, "मेरा यह अनुमान अभी भी बरकरार है कि आर्कटिक से बर्फ गायब हो सकती है।"
 
उन्होंने कहा, "इस साल सितंबर तक यहां 10 लाख वर्ग किलोमीटर से भी कम क्षेत्र में बर्फ रह जाएगी। अगर बर्फ पूरी गायब नहीं होगी तो भी इसके पूरे आसार हैं कि यह इस साल रिकॉर्ड लो लेवल तक तो पहुंच ही जाएगी। मैं इस बात से सहमत हूं कि आर्कटिक सी की बर्फ 34 लाख वर्ग किलोमीटर एरिया (वर्तमान कम स्तर) से भी कम इलाके में सिमट जाएगी।"

हेड प्रोफेसर ने कहा, "मुझे लगता है कि आर्कटिक में इस बात के पूरे चांस हैं कि यहां इस साल बर्फ 10 लाख वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र से भी कम में रह जाए। और अगर इस साल यह नहीं हुआ तो अगले साल तो ऐसा जरूर होगा।" प्रोफेसर ने कहा, "आइस-फ्री से मेरा मतलब है कि आर्कटिक के केंद्रीय भाग पार्ट और उत्तरी ध्रुव पर बर्फ नहीं होगी।"